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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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वृत्ति को दें। आपके गले में विजय की माला पहनाने के लिए 'विजयश्री' अजमेर के पास राजपूताने की बालू में लगातार दस दिन तक खड़ी रही। किन्तु ऐन मौके पर आप सुख की नींद सोते रहे। आपकी ढिलाई का फायदा उठाने में औरंगजेब सचमुच आपका बाप निकला। इसमें किसका दोष है?" अकबर बिना कुछ बोले उदास भाव से दुर्गादास की ओर देखता रहा। तब दुर्गादास ने उससे पुनः कहा, "क्या बड़ा तो दम बड़ा। आज पूरे हिन्दुस्तान में औरंगजेब जैसी प्रचंड शक्ति वाले बादशाह का तुम्हारे लिए मुकाबला करने वाला शंभूराजा के अतिरिक्त कोई और साहसी नहीं है।" दुर्गादास की बात शहजादे अकबर को ठीक लगी। शिवपुत्र संभाजी तरुण हैं। युद्ध क्षेत्र में घुड़सवार सिपाही उस पर जान देते हैं। ये सारी बातें शहजादे की समझ में आ गयीं। फिर भी शहजादे के मन के घोड़े किसी और दिशा में दौड़ रहे थे। उन्होंने दुर्गादास को अपने पास बुलाया। उनके कान के समीप लगकर बोला- "दुर्गादास थोड़ी और हिम्मत करें तो? हिरोजी फर्जन्द जैसे सम्भाजी के आदमी को फोड़कर एक नयी फौज बनाने की कोशिश करें तो?" शहजादे की उस निरर्थक कल्पना पर दुर्गादास को बहुत क्रोध आया। वे कहने लगे- "शहजादे, इस प्रकार के व्यर्थ के विचारों को अपने मन में लाकर पागल मत बनो। एक बात हमेशा ध्यान में रखो। मराठों के ये बलशाली किले और फौलादी शक्ति वाले सम्भाजी के वफादार सरदार कभी भी फूटने वाले नहीं हैं।" दुर्गादास की बात पर शहजादा जोर मे हँसा। वह कहने लगा- "मराठों के दुर्ग और किले आसानी मे जीते नहीं जा सके, यह मैं मानता हूँ लेकिन वफादारी का स्वाँग करने वाले मराठा सरदारों की वफादारी को प्रशंसा तो मेरे सामने नहीं ही कीजिए। जब समय आएगा तब सारी बातें मैं खोलकर बताऊँगा।" नौ चिराग के मद्धिम प्रकाश में अण्णाजी दत्तो का तैलीय स्याह चेहरा उजला दिख रहा था। उनकी तेज और बोलती आँखों में नया निखार आ गया था। पिछले दो महीने से शम्भूराजा का डेरा पन्हालगढ़ पर पड़ा था। वहीं से वे राज्य का कार्यभार संभाल रहे थे। आज राजधानी में अनुपस्थित रहना पन्त को आपत्तिजनक लग रहा था। 274 :: सम्भाजी