भारतकोश
छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

पृष्ठ 278, कुल 793 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 278

गया था। राहुजी सोमनाथ के हाथ में पहले जमादारखाने की चाभियाँ रहा करती थीं। किन्तु येसूबाई की कड़ी निगरानी में सबको रहना पड़ता था। समय बहुत कठिन था और दिन हानिकारक थे। हिम्मत बटोरकर राहुजी सोमनाथ ने कहा, "देखिए अण्णाजी, पिछले दो तीन महीनों से शम्भूराजा गढ़ पर नहीं हैं। इस अवसर का लाभ उठाया जाना चाहिए। सही समय पर शिकार कीजिए।" बहुत देर से चुप बैठे हिरोजी फर्जन्द भी आगे आ गये। "दूरदृष्टि की बात करें तो इस सम्भाजी को उसका पता तक नहीं है।" "जाने दीजिए न इस विलासी और मनचले शम्भूराजा से क्या अपेक्षा रखते हो?" राहुजी ने कहा। "गोब्राह्मण के प्रतिपालक शिवाजी महाराज के चिरंजीव ही अधर्म मचाने लगे हैं। शम्भूराजा को बचपन से ही दलितों के साथ खेलने कूदने की गन्दी आदत थी। उस काजी मुल्ला हैदर को अनावश्यक महत्त्व क्यों देते हैं, उस केलशी के मुसलमान याकूब बाबा को गुरु के रूप में क्यों मानते हैं? इधर उधर बच्चों को इनाम देने का अधर्म क्यों करते हैं?" "पन्त यह कुछ अधिक ही हो रहा है। ऐसा नहीं लगता क्या?" बीच में ही जवान निम्बालकर ने कहा। "मुल्ला हैदर को तो शिवाजी महाराज ने ही काजी बनाया था न? तुकाराम और रामदास के साथ याकूब औलिया बाबा को स्वयं शिवाजी महाराज गुरु मानते थे न? फिर यूँ ही बुद्धिभेद की यह भाषा आप जैसे बुजुर्ग द्वारा क्यों बोली जा रही है?" सोमाजी को निलोपन्त पर बहुत क्रोध आया। वे गुराये थे- "पिताजी के पुण्य के कारण महाराज ने आपको पेशवा बना दिया तो आप बड़े बुद्धिमान हो गये? चिरंजीव निलोपन्त! बैठिए, नीचे बैठिये।" अब अण्णाजी पन्त से रहा नहीं गया। शिखा टूटे या सिर इससे निश्चिन्त होकर उन्होंने अपनी भड़ास निकालने लगे। वे बहुत क्रुद्ध थे। उनकी साँसों की गति बढ़ गयी थी। दाँत पीसते हुए उन्होंने कहा, "भाइयो, इस राजा ने मेरी बेटी को भ्रष्ट किया। उसकी जिन्दगी समाप्त कर दी। इसका हमें उतना दुख नहीं होता ऐसा भी नहीं है कि मैं अपने स्वार्थ के लिए बोल रहा हूँ। पर इस शम्भूराजा के कारण हमारा हिन्दू धर्म संकट में पड़ गया है और लगता है कि भविष्य में वह पूरी तरह नष्ट हो जाएगा। इसी का मुझे अत्यधिक कष्ट है।" सभी भी निगाहें अण्णाजी की ओर मुड़ीं। अपने को सँभालते हुए अण्णाजी बोले, "गागा भट्ट ने अच्छे विधि विधान से राज्याभिषेक किया था फिर भी हमारे शिवाजी महाराज ने दूसरे राज्याभिषेक के समय उस तान्त्रिक निश्चल गिरि को 276 :: सम्भाजी

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास) · पृष्ठ 278, कुल 793 में से · BharatKosha