भारतकोश
छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

पृष्ठ 296, कुल 793 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 296

दृष्टि हाथियों के पैरों पर घूम रही थी। उन्हें लग रहा था कि हाथियों के पैर खून से लथपथ हैं। पाचाड़ की ओर राजा के स्वागत में नौबत बज रही थी। उसकी अनुगूँज से गढ़ के सप्त महल जाग उठे थे। दोपहर के पहले ही येसूबाई की शाही पालकी गढ़ से नीचे उतरी। उनके साथ दूसरी पालकी में कविराज की पत्नी तेजसबाई थीं। सम्भवतः किले के पास ही कविराज येसूबाई से मिले होंगे। कविराज के साथ अचानक येसूबाई को देखकर शम्भूराजा आश्चर्यचकित हुए। उनकी आँखों की भाषा समझकर येसूबाई ने कहा, "कविराज को मैं ही साथ ले आयी हूँ। कविराज के सम्बन्ध में आज गढ़ पर बड़ा प्रवाद मचा है।" "क्यों?" "कविराज द्वारा अपने वरिष्ठ अधिकारियों को हाथी के पैर के नीचे कुचलवा दिया, लोगों को लग रहा है कि कविराज कलश ही असली अपराधी हैं।" "लेकिन असली गुनहगार तो मैं हूँ...।" शम्भूराजा ने कहा। "लोगों को अन्दर की बातों का क्या पता? इसलिए उनके पूरे परिवार को लेकर मैं यहाँ आयी हूँ।" पछाड़ के महल की वह रात बड़ी सूनी सूनी लग रही थी। षड्यन्त्रकारियों की मृत्यु के समाचार से येसूबाई बहुत प्रसन्न हुई थीं। किन्तु बालाजी पन्त की मृत्यु के समाचार से उनका मन खिन्न हो गया। वे कुछ भयभीत भी हुईं। सप्त महल के पास अष्ट प्रधानों के महल थे। वहाँ बालाजी पन्त की वृद्धा पत्नी लक्ष्मीबाई का करुण क्रन्दन सुनाई पड़ रहा था। उसे सुनकर येसूबाई का गढ़ पर रहना कठिन हो गया है। इन्हीं खबरों से बनते विपरीत वातावरण के कारण ही येसूबाई गढ़ से नीचे उतर आयीं। बालाजी चिटणीस की आखिरी भेंट का प्रसंग येसूबाई को याद आ रहा था। सवेरे सवेरे वे किसी काम से परली की ओर जा रहे थे। जाते-जाते अपनी महारानी साहिबा से मिलने आये थे। उनके साथ हिरोजी और सोमाजी भी थे। वे लोग चिटणीस बिलकुल पास ही खड़े थे। बालाजी की मुद्रा अत्यन्त त्रस्त लग रही थी। वे कुछ कहना चाहते थे किन्तु किसी गम्भीर दबाव के कारण वे विवश हो रहे थे। येसूबाई ने बालाजी से पूछा था—"इतनी अफरातफरी में सवेरे-सवेरे सुधागढ़ और परली की ओर क्यों जा रहे हो? राजा तो पन्हालगढ़ पर हैं?" "राजा का ही काम है रानी साहिबा।" "कौन सा?" "राजा ने ही तो चिटणीस को शहजादे से मिलने के लिए कहा है। राजा ने उनसे बातचीत करने के लिए कहा है।" हिरोजी बीच में ही बोलने लगे। 294 :: सम्भाजी