छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
पृष्ठ 300, कुल 793 में से
संदर्भ में पढ़ेंहै। आपकी अनुपस्थिति में हमारा भी भाग्य फूट गया। हमें भी उनके साथ मिलना पड़ा। वे मुझे और मेरे पुत्र आवजी को जबरन शहजादे के पास ले जा रहे हैं। षड्यन्त्र का खत भी उन्होंने बलपूर्वक मेरे हाथ से लिखवा लिया। फिर भी रास्ते में अवसर निकालकर यह पत्र आपके पास पहुँचाने का प्रयास कर रहे हैं। खंडे राव से हमारी प्रार्थना है कि यह पत्र आपके पास समय से पहुँच जाए। हम बाप-बेटे की स्थिति साँप के गले में अटके मेंढक की हो गयी है। ईश्वरी लीला के सामने मनुष्य विवश है। बड़े महाराज कैलासवासी हो गये। तब इन्हीं लोगों ने आपको पकड़ने का षड्यन्त्र रचा था। उस बार पत्र आवजी के हाथ से लिखवा लिया था। इस बार हमारे पीछे पड़कर और छुरी दिखाकर मुझसे लिखवा लिया। वस्तुतः हमें शब्दों की सूली पर चढ़ा दिया। वह पत्र लिखते समय बड़ी यातनाएँ हुईं। परन्तु स्वामी आप सरस्वती पुत्र हैं, ज्ञान कोविद हैं। जितने क्रोधी हैं, उतने ही शान्त और उदार। स्वामी के भीतर तो गंगा बहती है। हमारे भाग्य में क्या लिखा है इसे कौन जाने ? जो होगा सो होगा। परन्तु शम्भू महाराज आपको और महारानी येसूबाई को सुयश मिले, सदा कल्याण हो। श्रीकृपा से जीवित रहे तो स्वामी की सेवा में पुनः तत्परता से हाजिर होंगे। अन्यथा ईश्वर पर सब कुछ अवलम्बित है। श्रम कम करें और अपनी तबीयत को सँभालें।'" बगल चन्दन के खंभे का सहारा लेते हुए शम्भुराजा पलंग पर बैठ गये। उनकी दशा ऐसी हो गयी जैसे किसी व्यक्ति का मेरुदंड टूट गया हो। उन्हें पसीना छूट रहा था। नौकर ने शीतल पेय का पात्र पकड़ाया उसे 'गट-गट' गले के नीचे उतारते हुए शम्भुराजा ने व्यथित होकर कहा, "येसू, यह कितना बुरा हुआ?" शिवाजी महाराज की मृत्यु के बाद आज पहली बार शम्भुराजा छोटे बच्चे की तरह रो रहे थे। उनके कन्धे पर हाथ रखकर सहारा देते हुए येसूबाई ने सान्त्वना के स्वर में कहा, "स्वामी सँभालिए अपने आपको। चिटणीस के बच्चों खंडो बल्लाल और निलो बल्लाल को इसके बाद हम अपने पेट के बच्चे की तरह पालेंगे। उन्हें सेवा का अवसर देंगे। उन्हें पेड़ की तरह बड़ा करेंगे।" 298 .: सम्भाजी