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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

पृष्ठ 310, कुल 793 में से

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पृष्ठ 310

इस घटना की स्मृति मात्र से औरंगजेब का दिल जल उठा। वह लम्बी साँस लेकर बोला, "काजी साहब जिस समय मुझे यह ख़तरनाक ख़बर मिली उसी क्षण मैंने दरबार ख़ारिज कर दिया और तख्त से उतरकर घुटने टेक दिये। नाक रगड़ते हुए मैंने अल्लाह का नाम लिया और अपनी पीड़ा व्यक्त की।" असदखान ने डरते हुए पूछा, "जहाँपनाह किसी ज़मींदार के राज्याभिषेक से आपके मन की इतनी बुरी दशा क्यों होनी चाहिए?" "वजीरेआज़म! साम्राज्य का निर्माण भी होता है और साम्राज्य डूबता भी है। उसका इतना क्या? किन्तु यहाँ तो एक किसान का बच्चा खेतों में कुदाल चलाने की जगह सिंहासन पर बैठकर महाराजा बन गया था। यह बुरी खबर सुनकर हमें ऐसा लगा कि कोई लोहे की जलती हुई सलाखों से हमारे कलेजे पर वार कर रहा है।" आलमगीर की मनःस्थिति का अनुमान लगाते हुए काजी अब्दुल वहाब ने पूछा, "बादशाह सलामत ! सम्भा को पराजित करने के लिए किबलाए आलम कितने वर्ष लगेंगे?" इस प्रश्न पर बादशाह ने अपनी सफेद दाढ़ी को बड़े प्यार से सहलाया। फिर मीठी मुस्कान के साथ काजी की ओर देखकर अपना एक अँगूठा ऊपर कर दिया। तब काजी साहब ने कहा, "एक वर्ष।" इसके साथ ही बादशाह ने प्रसन्नता से सिर हिलाया। औरंगजेब के साथ तीन लाख घोड़े दुलकी चाल से दक्षिण की ओर जा रहे थे। साथ में दो लाख पैदल सैनिक चल रहे थे। घोड़ों के पीछे साढ़े तीन हजार हाथी शान से चल रहे थे। उनमें सरदारों, दरकदारों और सेना के अधिकारियों के हाथी बहुत सुन्दर ढंग से सजाये गये थे। उनके गले में सोने चाँदी और किसी किसी के गले में ताँबे के घंटे लटकाए गये थे। खास खास हाथियों के पैरों में सोने चाँदी के तोड़े बाँधे गये थे। साठ सत्तर हाथी बादशाह की जनानियों को लेकर चल रहे थे। उनमें बेगमें, शहजादे, बादशाह की बहुएँ तथा वरिष्ठ मनसबदारों के परिवार वाले शामिल थे। सबसे बड़े हाथी पर चंदन की मेघाडंबरी रखी गयी थी। उसके महीन नीले पर्दे से बेगम उदयपुरी बाहर झाँक रही थीं। उनके साथ बादशाह की लाडली शहजादी जीनतउन्निसा बैठी थीं। मेघाडंबरी में सोना-चाँदी जड़ा हुआ था। मेघाडंबरी वाले हाथी के पीछे-पीछे राजपरिवार की स्त्रियों के हाथी चल रहे थे। अंबरी के आगे- पीछे छड़ी लिए खोजों, कश्मीरियों और अफगानियों की स्त्रीरक्षक सेना चल रही थी। बादशाही जनाना समूह ऐसा लग रहा था जैसे स्वर्ग में अप्सराओं का मेला लगा हो। हाथी दल के आगे-पीछे अपनी ऊँची गर्दनों को हिलाते हुए पचास हजार ऊँट चल रहे थे। 308 :: सम्भाजी

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