छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंइस चलते-बोलते नगर के साथ ढाई सौ बड़े बाजार आगे आगे चल रहे थे। फौज के साथ चल रहे मनुष्यों और जानवरों की संख्या इतनी प्रचंड थी कि फौज जहाँ रुकती थी वहाँ पचीस-पचीस, तीस तीस मील तक में पड़ाव पड़ता था। विभिन्न नगरों के सौदागर, व्यापारी, दलाल, नर्तकियाँ, उनके साजी, नौकर चाकर ऐसे पाँच छह लाख का जनसागर दक्षिण की ओर बढ़ रहा था। बाजार के सामान्य लोग और सैनिक सम्भाजी की चर्चा करके उपहास करते हुए हँसते थे। एक-दूसरे को ताली मारते हुए कहते थे-'अपने जगतविजयी आलमगीर साहब की यह चतुरंगिणी फौज सम्भाजी ने दूर मे भी देखी तो उसका कलेजा फट जाएगा। वह काफिर अपनी जगह पर ही डर कर मर जाएगा।' फौज के कूच करने के पहले ही कामगारों का समूह आगे निकलता था। हजारों कमाठी और बेगारी कन्धे पर फावड़ा और कुदाल रखकर रास्ता साफ करते हुए आगे निकलते थे। उनके पीछे बादशाह का प्रचंड तोपखाना निकलता था। बादशाह के साथ छोटी बड़ी सत्तर तोपें थीं। इन भारी तोपों को खींचकर ले जाना इतना कठिन था कि एक-एक तोप को खींचने के लिए बैलों की बीस-बीस जोड़ियाँ लगानी पड़ती थीं। रास्ते में पत्थरों और पहाड़ियों के आ जाने पर खींचने के लिए बड़े-बड़े हाथियों को जोता जाता था। इसके अतिरिक्त बादशाह के साथ तीन सौ छोटी तोपें थीं। बादशाह ने अँग्रेज, फ्रांसीसी, डच, जर्मन और पुर्तगाली गोलंदाज फिरंगियों को सेना में नियुक्त कर रखा था। इसके अतिरिक्त शाही खजाना, हीरे-जवाहरात, कार्यालय, पीने का पानी जैसी चीजों से लदीं हजारों बैलगाड़ियाँ और ऊँटगाड़ियाँ दक्षिण की ओर चल रही थीं। तोपखाने के पीछे घुड़सवार और उनके पीछे ऊँटों के काफिले थे। इसी के पीछे बादशाह का जनानखाना चल रहा था। अकेले बादशाह का सामान इतना अधिक था कि केवल उसे ढोने के लिए चौदह सौ ऊँट, चार सौ गाड़ियाँ और डेढ़ सौ हाथी लगते थे। औरंगजेब के पीछे करीब दो सौ वर्ष का उसके बाप-दादों का पुण्य प्रताप था। उसका समृद्ध खजाना ऐसा था कि कुबेर भी देखकर सिर झुका ले। काबुल कंधहार, आगरा, मथुरा, काशी, बंगाल, उड़ीसा, मालवा, गुजरात जैसे प्रदेशों में गरीबों के पेट पर पैर रखकर यह अतुल सम्पत्ति एकत्र की गयी थी। इसके साथ ही एशिया के आधुनिकतम शस्त्रास्त्रों का कारखाना और बारूदखाना औरंगजेब के पास था। इन प्रचंड शस्त्रास्त्रों एवं अतुल सम्पत्ति के सामने मराठों का छोटा-सा राज्य मानो विशाल हाथी के सामने छोटा सा बच्चा हो। शिवाजी-सम्भाजी के स्वराज्य का मतलब था मुम्बई और जंजीरे के हब्शियों का प्रदेश छोड़कर बेंगुली की सीमा से थाना जव्हार तक का कोंकणपट्टा, आगे नासिक बागलान का कुछ हिस्सा और जुन्नर को छोड़कर पुणे, सतारा, कोल्हापुर का भूभाग। इतनी ही थी उसकी भौगोलिक सम्भाजी .: 309