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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

पृष्ठ 325, कुल 793 में से

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भागा। वहाँ खान साहब भी अपनी जगह पर नहीं थे। वहाँ हमें सूचना मिली कि खान साहब पहले ही चुपचाप बादशाह के डेरे में चले गये हैं। सभी राजपूत योद्धा मुझसे नाराज हो गये। सभी ने विचार किया कि इन कपटी बाप बेटे के बीच अपनी बलि चढ़ाने से जीव बचाकर भाग जाना अच्छा है। नतीजा यह हुआ कि भोर में ही हम सभी राजपूत अपने डेरे-डंडे समेटकर अपने प्राण बचाने के लिए दूर भाग गये। क्या बताऊँ शम्भू महाराज, म्यान से तलवार निकाले बिना इस औरंगजेब नाम के व्यक्ति ने हमारी एक लाख की फौज को भगा दिया और शहजादे के लिए कब्र खोद दी।'' दुर्गादास के मुँह से सारी घटना को सुनकर सभी लोग सन्न रह गये। परिस्थिति को भाँपकर शम्भूराजा ने प्रश्न किया- "लोग तो कहते हैं कि आप बादशाह के सबसे प्रिय शहजादे थे। ऐसा भी कहते हैं कि आज भी आपको वापस बुलाने के लिए सन्देश पर सन्देश आते हैं?" "हाँ राजन, शाहंशाह के पत्रों में बड़े आत्मीय और प्रेम भरे शब्द होते हैं। किन्तु मैं कभी भूल नहीं सकता कि वह एक चालाक और बदमाश गीदड़ का नाटक है।" बोलते-बोलते अकबर बहुत भावुक हो गया। वह कातर स्वर में कहने लगा- "मेरे चाचाजान दारा कितने बड़े संस्कृत पंडित, विद्वान और योग्य व्यक्ति थे। वे दिल्ली की गरीब-गुर्बा हिन्दू और इस्लामी प्रजा के सहारे थे। हमारे दादाजान शाहजहान साहब के वे सबसे प्रिय शहजादे थे। उस दाराशुकोह को हमारे अब्बाजान ने धोखे से मार दिया था। अपने बचपन का वह दिन आज भी मुझे याद है। हमारे अब्बाजान औरंगजेब हम सभी को साथ लेकर राजमहल की तीसरी मंजिल पर बैठे थे। उसी समय नीचे रास्ते से भिखारियों से भी गंदा दिखने वाले एक व्यक्ति का जुलूस जा रहा था। उसके आगे पीछे शहनाई, झाँझ और तुरुहियाँ बज रहे थे। पीछे चलने वाले सभी लोग शाही दरबार के दिखाई पड़ रहे थे। "सभी के बीच में कीचड़ और गोबर से सनी एक रुग्ण हथनी चल रही थी। उसकी पीठ के हौदे में कोई मूलतः गौरांग किन्तु किस्मत की मार से काला हो गया एक तरुण बैठा था। उसके शरीर के शाही लिबास चिथड़े-चिथड़े कर दिया गया था। उसके शरीर पर सूखे रक्त के धब्बे थे। किसी ने उसे बेदम करके मारा था। फटे कपड़ों में सिर नीचा किये बैठे उस अभागे व्यक्ति के पीछे एक चौदह वर्ष का लड़का खड़ा था। वह लड़का भयभीत बकरी की तरह चारों ओर देख रहा था। उस पर मेरी नजर पड़ते ही मैं चौंक गया। बादशाह से चिल्लाक बोला- "अब्बाजान, आपने हाथी पर बैठे उम लड़के को देखा? वह तो अपना सिफीर है।" 'जी हाँ, जानता हूँ। वह अभागा आदमी तुम्हारा बेवकूफ चाचा दारा है और सम्भाजी 323

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