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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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भी सभी अनुभव कर रहे थे कि उनके मन में कुछ उथल-पुथल चल रही है। अपने मित्रों और बहादुर सहयोगियों से विदा लेते समय अत्यन्त भाव विह्वल स्वर में कहने लगे—‘‘जंजीरा और उसके आसपास का समुद्र तट आयात निर्यात और सामरिक दृष्टि से अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है। मेरे पिताजी ने एक बार मुझसे कहा था— बेटा शम्भू! अगर आप जंजीरे पर भगवा झंडा फहराने में सफल हो गये तो हमारे हिन्दवी स्वराज की सीमा को गंगा यमुना तक पहुँचने में देर नहीं लगेगी।’’ दो पहाड़ों पर अँधेरे का साम्राज्य घटने लगा था। वृक्षों और छोटी पहाड़ियों के आकार स्पष्ट दिखाई दे रहे थे। पंछियों और झरनों का कलरव स्पष्टतः सुनाई दे रहा था। इस भोर में ही शम्भुराजा का खासा और कवि कलश का तुर्की घोड़ा तेज गति से दौड़ रहे थे। उनके पीछे ईमानी रायप्पा का घोड़ा था और उनके पीछे चार सौ सवारों की सेना दौड़ रही थी। पिछली रात शम्भुराजा ने पाचाड़ कोट में पड़ाव डाला था और आज मुँह अँधेरे से ही दौड़ शुरू हो गयी थी। देखते-देखते पहाड़ का रमणीय प्राकृतिक परिसर आ गया। चारों ओर पहरेदारों की तरह चौकस खड़े पहाड़ और बीच में दूर तक फैली बाणकोट की खाड़ी दिखाई दे रही थी। दौड़ते-दौड़ते घोड़ों के मुँह के झाग निकल रहे थे। प्रातःकाल की आनन्ददायक सर्दी में भी ये जानवर पसीने के तर बतर हो रहे थे। उनके घुटनों तक लाल मिट्टी की परत चढ़ गयी थी। पूँछ के बालों में तमाम किरचें अटकी हुई थीं। वाणकोट खाड़ी के किनारे दूर से ही अनेक तम्बू और छोलदारियाँ दिखाई दे रहे थे। शम्भुराजा का नाविक दल पास आया। बाई ओर की पर्वत श्रृंखला को देखते हुए शम्भुराजा घोड़े से नीचे उतरे। उनके घोड़े की लगाम पकड़ने के लिए पाँच छ· कर्मचारी एक साथ आगे बढ़े। अभी भी हवा काफी सर्द थी। शरीर पर शाल ओढ़े और घोड़ों पर कपड़े बिछाये वृद्ध भायनाक भंडारी, दर्या सारंग, गोविन्दराव काँथे, सन्ताजी पावला, सिद्दी मिस्त्री जैसे नौसेना के अधिकारियों ने शम्भुराजा को घेर लिया। फूल मालाओं से उनका स्वागत किया। भायनाक को तो अपने राजा पर अत्यधिक गर्व सम्भाजी ३३३

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