छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
पृष्ठ 349, कुल 793 में से
संदर्भ में पढ़ें"कौन-सा आश्वासन महाराज ?" "कोंकण का यह टेढ़ा-मेढ़ा समुद्र तट, यहाँ के बन्दरगाह, यहाँ की खाड़ियाँ, यहाँ की ऊँची-ऊँची लहरें और लहरों को चीरते हुए जाने वाले यहाँ के रास्ते आपके परिचित हैं। आपसे अधिक उन्हें और कोई नहीं जानता। इसलिए आप बिना विलम्ब किये तैयार हो जाएँ। जंजीरे पर आक्रमण करके उस सिद्दी को समाप्त करें। स्वराज्य की इस महान सेवा से स्वयं को पवित्र करें।" दादजी देशपांडे उलझन में पड़ गये। वे कुछ काँपते हुए स्वर में बोले- "महाराज पानी में तो क्या ? आप यदि आग में भी कूदने को कहेंगे तो हम रंचमात्र भी नहीं हिचकेंगे। परन्तु इस अवसर पर एक और बात का ध्यान रखना आवश्यक है। अन्यथा धोखा हो जायेगा।" "कौन सी बात ?" "महाराज ! उस जंजीरे की तटबन्दी शिवाजी महाराज जैसे प्रतापी राजा के सामने भी नहीं झुकी। उसे मुगल दूर से सलाम करते हैं। पुर्तगाली और अँग्रेज जैसे फिरंगी भी उससे आतंकित हैं। ऐसे खतरनाक अभियान पर निकलना, इस तरह की खतरनाक योजना बनाना शेर का शिकार करने जैसा है।" "हाँ, मुझे वह सब पता है।" सम्भाजी ने हँसते हुए कहा। "सूबेदार ! जंगल के अनेक प्राणी शरीर से बहुत बलशाली होते हैं। किन्तु उनमे से कितनो की जान उनकी छोटी सी पूँछ में बसती है।" देशपांडे की आँखें चमकीं। उन्होने बीच में ही शम्भुराजा से पूछा—"कौन है जंजीरे की पूँछ ?" "उंदेरी का टापू। कुलाबा के पास का। उसके लिए जितना धन लगे लीजिए। फौज ले जाइए। कुछ भी कीजिए। लेकिन उंदेरी यह पूँछ रौंद दीजिए।" अपनी जरी के रूमाल से सिर का पसीना पोंछते हुए महाड़कर देशपांडे हँसते हुए बोले, "महाराज यह पूँछ भी बहुत विषैली है। उस थल गाँव के किनारे खूब मजबूत किला है। उस किले में ही अंग्रेजों का बारूदखाना है। वहाँ से पानी में एक मील पर उंदेरी टापू है। कोई भी प्रसग उपस्थित होने पर ये अँग्रेज उन हब्शियों की सहायता के लिए खड़े हो जाते हैं। अभी भी खड़े रहेंगे।" सम्भाजी राजा कुछ गम्भीर हो गये। आगे बढ़कर उन्होंने देशपांडे के हाथ में पान, सुपारी, नारियल दिया। उसे अपने माथे से लगाते हुए देशपांडे ने शम्भुराजा को सम्मानपूर्वक प्रणाम किया। तब उनका हाथ अपने हाथ में लेकर शम्भुराजा अवरुद्ध कंठ से कहने लगे—"काका ! यह राजपुर की घाटी बाजी प्रभु देशपांडे द्वारा पवित्र की गयी धरती है। इन सारी बातों को आप भली-भाँति जानते हैं। हम नया क्या बता सकते हैं? किन्तु इतना अवश्य कहेंगे कि यदि आपने उंदेरी पर विजय पताका सम्भाजी · 347