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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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फहरा दी तो कोंकण तट पर भी एक पवित्र नवीन घाटी .की स्थापना होगी। '' अपने साथियों में उत्साह भरने के शम्भुराजा के ढंग से कवि कलश बहुत प्रसन्न हुए। उंदेरी पर आक्रमण करने का अर्थ था आग से खेलना। इसलिए दादाजी देशपांडे कुछ चिन्तित दिखाई पड़ रहे थे। किन्तु शम्भुराजा केवल देशपांडे पर जिम्मेदारी डालकर चुप नहीं बैठे। वे स्वयं भी इस अभियान की तैयारी में लग गये। शस्त्रास्त्र, तरांडी, छोटी-बड़ी नौकाएँ आदि छोटी-छोटी बातों पर पूरा ध्यान दे रहे थे। समुद्रीतट पर भावी युद्ध का अनुमान शम्भुराजा को पहले ही हो चुका था। इसलिए उन्होंने शिवाजी महाराज द्वारा बनवाई गयी कुलाबा की तटबन्दी का बचा खुचा महत्त्वपूर्ण कार्य छ: सात महीने में पूरा कर लिया था। वहीं पर बारूद का समृद्ध भंडार बनाया गया था। इसके अतिरिक्त सागरगढ़ पर भी अनाज और बारूद की गोदामों को खचाखच भर दिया गया था। नागोण्णा और रोध्या की खाड़ी में बाइस गलवतें तैयार की गयी थीं। दरिया सारंग, दौलतखान और भायनाक भंडारी साथ में थे ही। चार हजार सैनिक तैयारी में जुटे थे। सैनिकों को प्रोत्साहित करने के लिए उन्हें दो महीने का वेतन पहले ही दे दिया गया था। अभियान की तैयारी चल रही थी। उसी समय कवि कलश ने शम्भुराजा से धीमे स्वर में कहा, ''राजन, किसी किसी व्यक्ति की चालाकी का अनुमान लगाना भी कठिन है। '' ''किसके सम्बन्ध में कह रहे हैं आप?'' ''अपने कोंडाजी बाबा फर्जन्द। उनकी उम्र पैंसठ वर्ष है। दिखते पचास के हैं। शरीर से स्वस्थ और बलिष्ठ हैं। फिर भी इस उम्र में इस प्रकार की अशिष्टता ?'' कवि कलश व्यथित स्वर में बोले। ''हुआ क्या है? कविराज ! आपको जो कुछ कहना है साफ साफ कह दें। '' ''राजन, समुद्र पार के देशों से हीरे जवाहरात इकट्ठा करने का शौक तो इन सिद्दियों को है ही साथ ही दुनिया की सुन्दरतम ललनाओं का शौक भी इन हब्शियों को कम नहीं है। सुना जाता है कि जंजीरे पर इन लोगों ने दुनिया भर की गोपियों का गोकुल बना रखा है। '' ''होगा। '' ''ऐसी बात नहीं है—किन्तु अब वहाँ मराठों नाते रिश्ते बन रहे हैं। इसलिए कहता हूँ।'' ''मतलब ?'' ''वहाँ पर नवाब सिद्दी कासिम की तीन अति सुन्दर रक्षिताएँ हैं। इन्हीं में एक नीली और पीताभ आँखों वाली ईरानी युवती दिलरुबा है। उसी पर हमारे कोंडी 348 :: सम्भाजी