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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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की किरणों को छूकर कोई तलवार चमक उठी हो। उसकी पतली छरहरी शरीर यष्टि, कजरारी कत्थई आँखें, नाजुक गड्ढेदार चिबुक, दरके अनार से अधखुले ओंठ और उसकी खनकती हँसी का बादशाह पर यह असर हुआ मानो किसी ने उसके सीने में कटार उतार दी हो। औरंगजेब वहीं पर होश गँवाकर बैठ गया। हीरा ने औरंगजेब की जिन्दगी में जिस तरह अचानक प्रवेश किया वैसे ही एक छोटी बीमारी के निमिन में चली भी गयी। लेकिन इससे बादशाह के हृदय में जो गहरा घाव लगा वह कभी भर न सका। काफिर सम्भाजी के सैनिकों द्वारा ध्वस्त किये गये अपने प्रिय बुरहानपुर का औरंगजेब ने देखा। ध्वस्त हुए महल, लुटी हुई सराफों की दुकाने रास्ते पर टूटकर गिरे हुए दरवाजे, खडहर और मिट्टी के ढेर देखकर बादशाह आग बबूला हो गया। व्यापारियों और नगरवासियों के उदास चेहरे देखे नहीं जाते थे। मिट्टी के एक बड़े ढेर के पास से गुजरते हुए बादशाह बगल म ध्वस्त हुए कब्रिस्तान को घूम घूमकर देख रहा था। उसने अपने एक पुराने और जानकार परिचित को हीरा की कब्र खोजने के लिए कहा। मुल्ला मौलवियों ने धमकी दी थी—"यदि हमें आगे बादशाही हिफाजन नहीं मिलती है तो हम शुक्रवार नमाज भी बन्द कर देंगे।" उसी समय उसकी प्रिय बेगम दिलरस बानू का लड़का होनहार शहजादा अकबर सम्भाजी से मिल गया था। उसने अपने पिता के विरुद्ध जंग का ऐलान कर दिया था। इससे आलमगीर बहुत दुखी था। अपनी वरिष्ठता का हवाला देकर बादशाह ने उसे मनाने के लिए जो सन्देशे में भेजे, उन्हें उसने अस्वीकार कर दिया। उल्टे उसने अपने पिता को पत्र लिखकर भेजा—"आपके कार्यकाल में सल्तनत रसातल को चली गयी। मुल्ला मौलवियों की इज्जत समाप्त हो गयी। बुढ़ापे में तुम्हारे कर्मचारी तुम्हारे अनुशासन में नहीं हैं। सभी अधिकारी रिश्वतखोर हो गये हैं। ऐसे बूढ़े बादशाह से प्रजा उम्मीद भी क्या करे?" अपने शहजादे अकबर के प्रसंग में औरंगजेब ने सभी सहकर्मियों की घोर भर्त्सना की थी। "उस हरामजादे दुर्गादास राजपूत के साथ शहजादा निकल गया है। जहाँ भी मिले उसे रोको, पकड़ में नहीं आ रहा है तो उसे कत्ल कर दो। ऐसा फरमान मैंने निकाला था। किन्तु दक्षिण में हमारे सभी कर्मचारी और अधिकारी नामर्द साबित हुए।" "लेकिन जहाँपनाह, वह दुर्गादास राठौड़ दुनिया भर के बदमाशों का सिरमौर है।" असदखान ने कहा। "यह बात सच है असदखान।" औरंगजेब ने दीर्घ निःस्वास लेकर कहा, सम्भाजी 353