छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
पृष्ठ 357, कुल 793 में से
संदर्भ में पढ़ेंनदियाँ, किले, पुराने मन्दिर, घाटियाँ आदि उस नक्शे मे दिखाये गये थे। सेनानियों अथवा कर्मचारियों के नाम लेते ही बादशाह उस जगह पर झट से उँगली रख देता था। बादशाह अपने सहयोगियों से कहने लगा—"मैंने निश्चय कर लिया था कि एक न एक दिन शिवाजी की हुकूमत को नष्ट कर दूँगा किन्तु पिछले बीस-पचीस वर्षों में हमे फुर्सत ही नहीं मिली। सुयोग से वह शिवाजी भी कम उम्र निकला। उसकी मृत्यु के बाद एक बार लगा था कि अब दक्खिन खाली घोड़े दौड़ाना है। सारा प्रदेश अपने आप कब्जे में आ जाएगा। लेकिन अफसोस। इस अभियान का रंग तो कुछ और ही दिखाई पड़ रहा है। खैर ठीक है ।" फिर से बादशाह की नजर नक्शे पर घूमने लगी। उसने असदखान से कहा, "वजीरे आजम, जजीरे के उस सिद्दी को लिखो—उससे कहो—पूरी ताकत के साथ आप कोंकण के किनारे से निकलो उस सम्भाजी का पूरा प्रदेश जलाकर खाक कर दो।" "जी, जहाँपनाह।" "उस पुर्तगाली गवर्नर को लिखो—देखो भाईजान सम्भाजी का प्रदेश दिल्ली के आसपास नहीं है। वह तुम्हारे गोवावासियो का पडोसी है। हमने जरा-सा अवकाश दे दिया तो सम्भाजी तुम्हे निगल जाएगा। इसलिए आप दक्षिण कोकण की ओर से मराठो पर हमला करो।" "जैसा हुक्म हुजूर।" बोलते बोलते बादशाह ने हसन अली खान पर नजर डाली। "हसन जवामर्द! तुम्हारे जोड का मजहब का रखवाला दूसरा कोई नहीं है। इस्लामी कौम में तुम अपनी तरह के अकेले बहादुर हो। मथुरा में फौजदार के पद पर कार्य करते हुए तुमने विद्रोही गोकुल जाट को जिन्दा पकड़ा था। कोतवाली में ले आकर उसके टुकड़े टुकड़े किये थे।" "जी हुजूर।" "उदयपुर के आसपास एक सौ छिहत्तर मन्दिरों को तुमने ही जमींदोज किया था। तुम्हारे जैसा धर्म का पालनहार है कोई इस दुनिया में?" "हुक्म करो हजरत खाली हुक्म करो।" अपनी छाती ठोकते हुए आधा उठकर हसन अली गरजा। "अपनी बीस पचीस हजार की फौज लेकर नासिक के रास्ते कोकण में जाओ। माहुली के किले पर अधिकार करके भिवंडी और कल्याण को खाक करते हुए रायगढ़ की ओर बढो। एक ओर से पानी के रास्ते जजीरे के हब्शी, दक्षिण से गोवा के पुर्तगाली और तुम पूरे मराठा प्रदेश की नेस्तनाबूद कर दो। तीनो ओर से उम्हे रौंदते हुए रायगढ़ की ओर आओ। उन मक्कारों के रायगढ़ पर मैं अपना चाँद सम्भाजी 355