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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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सितारा फहराते हुए देखना चाहता हूँ और वहीं पर खुदा की नमाज पढूँगा। ऐसा होने पर आलमगीर को चैन की मौत आये। ऐसी मेरी दिल्लो इच्छा है। अय खुदा इससे बढ़कर मेरी कोई दूसरी हसरत नहीं है।" बादशाह के जोशीले उद्गारों से सभी सवारों, अधिकारियों और कर्मचारियों में उत्साह भर गया, उनकी आँखें चमकने लगीं। शाहंशाह इधर-उधर देखने लगा। वह जहाज की टूटी लकड़ी की तरह कुरकुराते हुए कहने लगा-‘‘देखेंगे, एक तरफ तिरसठ साल का हिन्दुस्तान की सल्तनत का बादशाह, दूसरी तरफ उस जमींदार शिवाजी का नादान-नासमझ बच्चा। एक ओर बाइस विशाल प्रान्तों की दौलत, तैमूर के पाक वंशजो की दो सौ वर्षों की विरासत और दूसरी तरफ मरगट्ठों का जरा-सा लँगोट जैसा स्वराज्य।‘‘ ‘‘हम उनका खात्मा करेंगे हुजूर।‘‘ जुल्फिकारखान गरजकर बोला। ‘‘पागल मत बनो। खात्मे की फिजूल बात मत छेड़ो, नीचे बैठो।‘‘ औरंगजेब कठोर शब्दों में बोला, ‘‘तुम सारे लोग मूर्ख हो। अभी चार दिन की ही तो बात है। हिन्दुस्तान के बादशाह की पाँच लाख की सेना यहाँ डेरा डाले थी। फिर भी तो हंबीरराव नामक एक मूर्ख मराठा, यहाँ से कुछ कोस की दूरी पर अपने लुल्फल्लाखान की छानवी पर डाका डाला, वहाँ की रसद लूटी इसका मतलब क्या है? बोलोऽऽ‘‘ सभी ने गर्दने झुका लीं। गम्भीर साँस लेते हुए बादशाह पुन बोला ‘‘इसका मतलब इतना ही है कि होशियार रहो। हमारा यह दक्खिन का अभियान कठिन नहीं है लेकिन आसान भी नहीं है। एक जरा सा काँटा बहादुर मर्द के पसीने छुड़ा देता हैं। छोटी सी चींटी ताकतवर हाथी की सूंड में घुसती है तो ताकतवर हाथी को कुत्ते की तरह कीचड में लोंटा देती है। बेवकूफ मत बनो। जागोऽ जागोऽऽ।‘‘

छह

जंजीरे के सामने विशाल खाड़ी का फैलाव। उसके किनारे राजपुरी नाम का एक छोटा-सा गाँव। उस गाँव के पीछे खड़ा पत्ताड़ा पहाड़। पहाड़ की छाया सामने के जलाशय में पड़ रही थी। वह छाया समुद्र में पाँव पसारकर बैठे हुए महाकाय राक्षस जैसी लग रही थी। निचले हिस्से में राजपुरी गाँव घने पेडों की छाया में छुपा हुआ था। बीच में दिखाई देने वाली मम्जिदों की मीनारें और मन्दिरों के कलश मानो 356 सम्भाजी