छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंकुछ भी बोलने की मनःस्थिति में नहीं थे। इतने में ही शहजादे को दूर हटाकर दुर्गादास शम्भूराजा से माफी माँगने के लिए वहाँ पहुँचे। शम्भूराजा ने रूपकुँवरि के दुखी चेहरे की ओर देखा। अपनी कमर में बँधी सोने की मुहरों वाली थैली उसके हाथ में पकड़ाते हुए वे बोले, "कोई पूछे तो कह देना कि महाराज को कोई बहुत महत्त्वपूर्ण कार्य था, इसलिए चले गये। पर जाते समय इतना धन इनाम में दे गये हैं जो दस महफिलों के बराबर है।" रूपकुँवरि ने बड़ी विनप्रता से इनाम स्वीकार किया और सलाम करके बगल में हट गयी। शम्भूराजा जब अपने घोड़े की ओर बढ़ने लगे तब मौका पाकर दुर्गादास अत्यन्त विनीत स्वर में कहने लगे—"महाराज, आप इस शहजादे का बचपना इतने दिनों से देखते आ रहे हैं। उसके लिए इतना बुरा क्यों मानना चाहिए।" अनेक प्रकार के विचारों के मन्थन से शम्भूराजा की मुखमुद्रा बदल गयी थी। उन्होंने कहा, "नहीं दुर्गादास, अब इससे अधिक एक पल भी हम इस महफिल में नहीं रुक सकते। सच कहूँ तो मैं बड़ी रसिकता से इस महफिल में आया था। पर आपसे कैसे बताऊँ कि जब यहाँ तबले पर थाप पड़ती थी तो मुझे कानों के पर्दे फाड़कर कलेजे को दहला देने वाले तोपों के धमाके सुनाई पड़ते थे। अब यहाँ पर एक क्षण भी रुकना मेरे लिए अपराध होगा।" सात "कविराज, कर्नाटक में इक्करी के नायक और गोलकुंडा के कुतुबशाह को सन्देश भेज दिया गया?" "हाँ, उसी दिन।" कलश ने मुस्कराते हुए राजा की ओर देखा। शम्भूराजा की प्रश्नार्थक मुद्रा को देखते हुए कवि कलश तुरन्त बोले, "कमाल है आपका महाराज, जंजीरे की इस युद्ध भूमि पर अपने तम्बू के आसपास आग बरस रही है। ऐसे समय में भी आपको कर्नाटक की राजनीति का ध्यान बराबर बना हुआ है?" "कविराज, औरंगजेब पाँच लाख की सेना लेकर हमारे स्वराज्य की ओर बढ़ रहा है। इसका ध्यान तो है न आपको? इतनी विशाल सेना कुछ वर्षों तक युद्ध भूमि में जूझती रहेगी। औरंगजेब के साथ यह हमारी आखिरी लड़ाई होगी। उस समय 364 :: सम्भाजी