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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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रसद और बारूद की बड़ी आवश्यकता पड़ेगी। जिंजी तंजौर जैसे दक्षिण के प्रदेशों से ही हमें वह प्राप्त हो सकेगी। "इसीलिए तो हमने हरजी जैसा बलशाली योद्धा कर्नाटक में नियुक्त किया है।" "वह तो बलशाली है ही, किन्तु मैसूर का राजा चिक्कदेव राय उसकी अपेक्षा कई गुना पराक्रमी है। पहले से ही वह मराठों से खार खाये बैठा है। उसके प्रदेश में जाकर उसे पराजित करना और औरंगजेब के विरुद्ध खड़ा करना अकेले हरजी के बूते की बात नहीं है।" कविराज ने शम्भुराजा से पूछा, "इसका मतलब कर्नाटक पर महागज आक्रमण ?" "हाँ, क्यों नहीं?" शम्भुराजा ने कहा, "उसकी तैयारी करनी है। चिक्केराय स्वार्थी है। वह औरंगजेब से हाथ मिलाने में भी विलम्ब नहीं करेगा। कविराज, न चुकाया गया कर्ज, अनबुझी आग और बचे हुए शत्रु ये तीनों चीजें बढ़ती ही जाती हैं और अन्ततः घातक सिद्ध होती हैं। ऋणशेषाग्निशेषः शत्रुशेषस्तथैव च। पुनः पुनः प्रवर्धन्ते तस्माच्छेषं न रक्षयते ।। "इसलिए चिक्कदेव राय को भी अपना हाथ दिखाना आवश्यक है।" "वाह !" "कल अगर औरंगजेब के घातक आक्रमण को रोकना है तो सम्पूर्ण दक्षिण प्रदेश को एकत्र संगठित करना होगा। इसीलिए हम कुतुबशाह, आदिलशाह जैसे लोगों को बार बार सन्देश भेज रहे हैं।" कर्नाटक जैसी अनेक समस्याओं का समाधान खोजना है किन्तु उन सबसे पहले जंजीरे की उलझन सुलझानी है। सामने जंजीरे की ओर देखते हुए शम्भुराजा स्वप्न में खोये हुए से प्रतीत हो रहे थे। विगत महीने भर में उन्होंने जंजीरे के असंख्य अनोखे रूप देखे थे। ज्वार के समय ऊँची लहरें जंजीरे को चारों ओर से घेर लेतीं तो वह समुद्र में तैरते काले जहाज सा दिखाई देता। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय किरणे जब चमकती हुई पानी में उतरती तो वह किसी जादूनगरी के जादुई महल सा दिखाई पड़ता। ज्वार के समय जब तेज लहरें जंजीरे की तटबन्दी के साथ ऊपर उठतीं तो लगता जैसे समुद्र देवता इस महादुर्ग का जलाभिषेक कर रहे हैं। और जब पानी तेजी से नीचे उतरता था तथा तटबन्दी के आसपास की जगह निकल आती थी तब जंजीरे का स्वरूप कुछ और ही हो जाता था। ऐसे लगता था जैसे कोई कुशल तैराक अपने एक हाथ में मन्दिर उठाये पानी को चीरते हुए चला आ रहा है। सम्भाजी 365