छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें"क्यों नहीं कविराज, एक बार यह सामने वाला जंजीरा जीत लिया तो हमें तुरन्त स्मरण दिलाइये, उसकी सारी सम्पत्ति जब्त कर लेंगे।" उसी बैठक में दादजी, कवि कलश, दुर्गादास और भयानक भंडारी की नजरें एक दूसरे से मिलीं। उन बेचैन नजरों की अभिव्यक्ति दादजी के मुख से बाहर आयी-"महाराज सेना की तैयारी ठीक-ठाक हो गयी है। इस झूठ-मूठ की लड़ाई से तो शरीर की ठंडक भी दूर नहीं होती। हाँ महाराज शिवराय का बेटा शत्रु पर किस प्रकार आक्रमण करता है, यह देखने के लिए हमारी सेना बहुत उत्सुक है।" कविराज ने कहा। सम्भाजी कहने लगे-"कभी-कभी यह जंजीरा ही हमें अद्भुत लगता है। इस दंडराजपुरी के मैदान में शिवाजी महाराज जैसे महान राजा ने आठ बार आक्रमण किये। तलवारबाजों की तलवार की धार को कुंठित और बुद्धिमानों की तेज बुद्धि पर जंग चढ़ा देने वाला यह किला पता नहीं कि मुहूर्त में बनाया गया होगा ?" शम्भूराजा इस चर्चा गोष्ठी से यकायक उठकर खड़े हो गये। अपने तम्बू में जाते-जाते रुके और पीछे मुड़कर कवि कलश से बोले, "देखो कविराज पंचांग लो, अपनी तंत्र विद्या का भी उपयोग करो। एक बार इस रहस्य का उद्घाटन अवश्य होना चाहिए कि आखिर यह किला किस मुहूर्त में खड़ा किया गया था?" उस दिन कविराज का मन बहुत उद्विग्न हो गया था। राजा के उस कठिन प्रश्न का उत्तर खोजने का उन्होंने निर्णय लिया। आसपास के क्षेत्रों का दौरा किया, बड़े बूढ़ों से चर्चा की, लोगों से पूछताछ की और रात को प्रसन्नचित्त होकर युद्ध भूमि में लौटे। वे बड़े उत्साह से कहने लगे-"राजन, आखिर भेद खुल ही गया। जब इस जलदुर्ग की नींव डाली गयी थी उस समय अमृतयोग था।" "क्या कह रहे हैं कविराज ?" "हाँ, मैं इस रहस्य की जड़ तक पहुँच चुका हूँ। जिस समय हब्शियों ने यह किला बनाने का निश्चय किया उस समय पास के नादगाँव में गणेश पंडित नाम के एक जोशी बाबा रहते थे। पंचांग से मुहूर्त निकालने में उन्हें महारत हासिल थी। यह खबर जब हब्शियों को मिली तो उनके घोड़े जोशी बाबा के दरवाजे पर जा खड़े हुए। परन्तु जब उनकी छोटी बेटी ने बताया कि वे घर पर नहीं हैं तो हब्शी घुड़सवार उदास हो गये। वह छोटी बच्ची दरवाजे से बाहर आकर उनके आने का प्रयोजन पूछा। सवारों ने बताया कि नींव डालने के लिए मुहूर्त पूछना था। लड़की हँसते हुए बोली-'बस इतना ही काम था? बाबा के पास बैठकर मैंने पंचांग देखना सीखा है। मैं बता देती हूँ आपको अच्छा मुहूर्त'। "जोशी बाबा ने अपने दरवाजे से हब्शियों के घोड़े लौटते हुए देखे तो घर आकर बेटी से सारा समाचार पूछा। बेटी ने सारी घटना कह सुनाई। उसने अपने द्वारा सम्भाजी :: 367