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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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बहादुरों के भी सीने फटे जा रहे थे। तेजी से घुस जाने वाले बाणों के कारण उनकी आँखें सफेद पड़ती जा रही थीं। राजा हरजी और सम्भाजी राजा ने बड़ी हिम्मत बाँधी थी। उसी शाम को तंजौर से एकोजी राजा की सेना आकर पहुँची। उनके साथ पाँच हजार घोड़े थे। पर विषैले बाणों के आगे उनकी भी कुछ न चली। अनेक अच्छे घोड़ों और बहादुर जवानों की सम्पदा नष्ट हो रही थी। कुतुबशाही सेना की कमर टूट गयी थी। बाणों की वर्षा में वे बेसहारा औरत की तरह चीखने लगे थे। भोजन का समय करीब आ गया। रात हो चुकी थी। थके-हारे मैसूर के सैनिक भोजन के लिए रुके होंगे। युद्ध कुछ समय के लिए बन्द हो गया था। शम्भूराजा की आँखों के सामने ही एक मराठी जवान के सीने में विषैला बाण घुस गया। उसके रक्त के छींटे राजा की आँख में पड़े। राजा की आँखें अभी तक कडुआ रही थीं। एकोजी राजा ने अपने भतीजे शम्भूराजा का आलिंगन किया। दीर्घ निःश्वास छोड़ते हुए शम्भूराजा ने कहा—"क्षमा करें चाचाजी, पराभव के समय आपसे भेंट हुई, इसका मुझे बहुत खेद है।" "जाने दे शम्भू बेटे। अच्छे दिन भी आएँगे। माँ भवानी की कृपा से सब ठीक हो जाएगा।" एकोजी राजा ने पिता की तरह सान्त्वना दी। मराठों और उनके साथियों की सेना टूट चुकी थी। अब युद्धभूमि छोड़कर हट जाने के अतिरिक्त कोई उपाय न था। रात में आक्रमण होने की कोई सम्भावना नहीं थी। वहाँ से यथाशीघ्र हट जाने में ही बुद्धिमानी थी। उद्विग्न हुए शम्भूराजा ने मशालची को पास बुलाया। बगल के तालाब के पास पेड़ों और बाँसों की घनी छाया थी। चिक्कदेवराजा और उसकी सेना की आँखों में धूल झोंकने के लिए पेड़ों पर मशालें जला दी गयीं। उन्हें यह आभास दिया गया कि मराठे विश्राम कर रहे हैं। तब हरजी, शम्भूराजा, कलश और एकोजी राजा बचे खुचे घोड़ों और सैनिकों को बाहर निकाल रहे थे। युद्धभूमि से भागने की अपमानजनक स्थिति शम्भूराजा की जिन्दगी में पहली बार आयी थी। एकोजी राजा ने निश्चित किया कि वे तंजौर जाएँगे। रातभर सेना भागती रही। दूसरे दिन दोपहर की धूप चढ़ी। थकी हारी सेना की गति मन्द पड़ गयी। एक तालाब के किनारे सेना रुकी। जख्मों पर पट्टी बाँधी जा रही थी। सैनिक कुछ सचेत हो रहे थे। शम्भूराजा की आँखें सूजी हुई दिखाई पड़ रही थीं। उनकी नाक पर भी चोट आयी थी। बायें हाथ में एक बाण चुभ गया था। उस घाव को देखकर ज्योत्याजी, केसकर, कविराज, रायप्पा आदि सभी उदास हो गये। कुछ लोगों को तालाब के किनारे पहरे पर खड़ा किया गया था। वहीं पर चिक्कदेवराजा का एक हरकारा आया। चिक्कदेव ने शम्भूराजा को चेतावनी देने के 404 :: सम्भाजी