छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंऔरंगजेब ने वजीर को अधिक सोचने का अवसर नहीं दिया। उसने ठंडी आवाज में कहा- "वजीरे-आजम हमारे उस छोटे शहजादे आजम पर भी कड़ी नजर रखिये।" "क्या किब्लाए आलम ?" औरंगजेब के संशय का भूत दूसरे शहजादे को ग्रसेगा। इसका धक्का वजीर को लगा। "हाँ, उस पर कड़ी निगाह रखो।" "निगाह? क्या बात कर रहे हैं जहाँपनाह ?" "हमारे हुक्म की सिर्फ तामील करो? उस बेवकूफ दिलेरखान और शहजादे आजम को तुरन्त वापस बुलाओ।" "मोर्चे से?" "जी हाँ, बिलकुल।" वजीर विवश हो गया। उसने दोनों को वापस आने का आदेश भेज दिया। यह समाचार सुनते ही शहजादे की बेगम और बच्चे भयभीत हो गये। उदयपुरी बेगम और शहजादी जीनतउन्निसा घबरा गयी। बादशाह के पीछे असदखान उन दोनों से मिला। उसने चिन्तित स्वर में कहा "बेगम साहिबा! बेटी जीनत! सफलता मिलने से आदमी खुश होता है।, असफलता से दुख होता है। इतनी प्रचंड सेना और तीस पैंतीस बड़े बड़े सरदार युद्ध में उतरे फिर भी बादशाह को जीत नहीं मिल पायी। उसी दर्द मे वे पागलो जैसा बर्ताव करने लगे हैं। संशय के भूत ने तो उनके दिमाग पर कब्जा कर लिया है। इस भयानक पीड़ा से उन्हें मुक्त करने के लिए महल से बाहर निकलने दीजिए। उन्हें किसी यात्रा पर ले जाइये। उनके दिमाग को थोड़ा विश्राम दीजिए।" बादशाह का मन किस तरह बहलाया जाये? यह उदयपुरी बेगम की समझ में नहीं आ रहा था। अन्त में उसे एक अच्छा विषय मिल गया। उन्होंने एक सुबह की नमाज के बाद बादशाह से प्रार्थना की-"मेरे आका अपनी जिन्दगी में इस नाचीज ने जहाँपनाह से किसी बात के लिए प्रार्थना नहीं की। अब एक ही विनती है! आप हमारे साथ एक दिन के लिए बेरूल चलें।" बादशाह ने हँसते हुए बेगम की ओर देखा। उन्होंने कहा, "वह बेरूल काफिरों का भूतखाना है। यह मालूम है न बेगम साहिबा को।" "जी अब्बाजान! पर वहाँ पर एक चमत्कार है। वहाँ की एक गुफा में एक नीलरंग का पंछी रहता है। उसे नीलकंठ कहते हैं। उस पंछी को आप एक बार सम्भाजी . 449