छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
पृष्ठ 452, कुल 793 में से
संदर्भ में पढ़ेंआँख भरकर देख लीजिए।" बादशाह ने उपहास की मुद्रा में बेगम की ओर देखा। वहाँ पर असदखान, उसका बेटा जुल्फिकारखान और बादशाह की बहू शहरबानू बेगम उपस्थित थे। उन सभी को बेगम और शहजादी साहिबा के विचित्र अनुरोध से आश्चर्य हो रहा था। बादशाह ने हँसते हुए कहा, "बेगम साहिबा सीने पर तलवार की नोंक रखने पर भी मेरे सामने कोई काफिर उस देवता का नाम लेने का साहस नहीं करेगा। इस तरह के उस नर्क में आप मुझे ले जाना चाहती हैं?" "गुस्ताखी माफ़ हजरत ! किसी फालतू निरर्थक बात के स्वामी से हम प्रार्थना करें ही कैसे?" "फिर ऐसा वहाँ क्या है?" "वही तो असली चमत्कार है हजरत ! जो व्यक्ति उस नीलकंठ को एक टक निहारता है, उसे धीरे-धीरे उस गुफा में अपने भविष्य का आईना दिखाई देने लगता है। अगले जन्म में हमें क्या होना है? जानवर कि पंछी इसका वहाँ प्रत्यक्ष दर्शन हो जाता है।" बादशाह का मन स्थिर नहीं था। किन्तु बेगम उदयपुरी की बताई कहानी में उसे बहुत मजा आ रहा था। अपनी लाडली शहजादी जीनत का मन भी वह तोड़ नहीं पा रहा था। दूसरे दिन शाही दल बेरूल की ओर निकला। बहू-बेगम, पोते, बच्चे सभी साथ लेकर बादशाह बेरूल के लिए निकल पड़ा। उन्हें ले जाने के लिए सजे-सजाए सत्तर हाथी, कुछ हजार घोड़े और ऊँट साथ जा रहे थे। शाम को लगभग चार बजे शाही दल बेरूल गुफा के पास पहुँचा। ऊँचा कैलाश मन्दिर देखकर बादशाह की भौंहें तन गयीं। वह जुल्फिकारखान से बोला, "बेटेऽऽ सम्भा के साथ इन मरहठों की हड्डी नरम करते ही हम इस कैलाश मन्दिर की जगह पर ही एक खूबसूरत मस्जिद खड़ी करेंगे। इस बात को याद रखना।" आखिर सभी लोग गुफा के पास पहुँचे। नीले रंग के उस पंछी की ओर औरंगजेब आँखें फाड़-फाड़कर देख रहा था। कुछ समय तक उसे कुछ साफ दिखाई नहीं पड़ा। थोड़ी देर में उसे कुछ अस्पष्ट-सा दिखाई पड़ा। वह डर गया। नहीं, उसकी मुखमुद्रा विकृत हो गयी। उसने अपने माथे का पसीना पोंछा। फिर बारीक नजर से देखकर वह चिल्लाया, "पागल कहीं के, चलो, भागो यहाँ से दूर, काफ़िरों के इस कबरिस्ता से।" बादशाह ने अपना एक छोटा-सा चबूतरा बेरूल गुफा के सामने बनाने का हुक्म दिया। वहाँ के देवता, नाचनेवाले यक्ष-किन्नर, पत्थरों में उकेरे गये पशु-पक्षी इन सभी पर बादशाह को बहुत क्रोध आ रहा था। उसने कमाठियों की टोली को 450 :: सम्भाजी