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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

पृष्ठ 454, कुल 793 में से

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सात औरंगजेब के यहाँ गहरा सन्नाटा था। बादशाह ने कासिमखान, रणमस्तखान, पन्नी, खानजहानखान, बक्शी बरामदखान, मुहम्मद अमीन, असदखान, जुल्फिकारखान जैसे अपने खास सरदारों को विचार-विमर्श के लिए बुलाया था। किन्तु सभी लोग अन्दर से बहुत घबराये हुए थे। बादशाह की ऐसी अस्थिर और संशयी मनःस्थिति पहले कभी नहीं देखी गयी थी। दिलेरखान जैसे जिन्दगी भर के बादशाह के सेवक की हालत बुरी हो गयी थी। उसे लड़ाई के मोर्चे से वापस बुला लिया गया था। उसके आगे-पीछे बादशाह की पाँच हजार की सेना लगी थी। उसके हाथ में अभी तक जंजीरें नहीं पड़ी थीं किन्तु वह दिन अब अधिक दूर नहीं था। उसे पूरी तरह अपमानित करके उसे खींचकर वापस लाया जा रहा था। वापसी की यात्रा में पड़ाव की जगहों पर कड़ा पहरा बिठाया जाता है। बादशाह का चेहरा खिन्न था। वह हँसने की कोशिश कर रहा था, लेकिन हँसी आ नहीं रही थी। वह उदास होकर बोला, ‘‘खैर, असदखान डेढ़-दो साल से सम्भा के इस मनहूस मुल्क में इतनी बड़ी सेना लेकर इधर उधर घूम रहे हैं। भेड़ बकरियाँ लेकर घूमने वाले गड़ेरियों की तरह हम भी यहाँ वहाँ भटक रहे हैं। पर बताइए क्या लगा हमारे हाथ? सह्याद्रि की पहाड़ी में उस काफिर के बच्चे सम्भा का हुड़दंग हम एक बार समझ सकते हैं। किन्तु यहाँ अहमदनगर और बराह तक वह हंबीरराव रात-दिन दौड़ रहा है। दस-पन्द्रह हजार की फौज लेकर हमारे प्रदेश को बर्बाद कर रहा है।’’ ‘‘हजरत, वह हंबीरराव पूरा शैतान है। उसके घोड़ों के पैरों में आसमानी बिजली के घुँघरू बँधे हैं। शत्रु ही नहीं हमारे सैनिक भी खुलेआम यही बात कहते हैं।’’ मुमदरखान बीच में ही उठकर बोला। ‘‘बैठ जाओ मूर्ख! यह तो उस काफिर की बदनामी नहीं तारीफ है, बेवकूफ!’’ बादशाह गुर्रया। आज बादशाह का क्रोध देखने लायक हो गया था। असदखान भी डर गया था। उसके मुँह से शब्द नहीं निकल रहे थे। औरंगजेब ने जैसे ही अपनी निगाह घुमाई सभी सिर झुकाकर खड़े हो गये। बादशाह ने कहा, ‘‘आखिर मैं भी इन्सान हूँ। आप दख्खन में एक दिन में बहुत बड़ी विजय प्राप्त कर लें ऐसा मैं नहीं करता। मेरा सवाल बस इतना है—जुल्फिकारखान?’’ 452 :: सम्भाजी

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