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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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बारदेश के चारों किलों पर अपना अधिकार कर लिया। फिरंगियों के शासन से हमें मुक्त किया। पर महाराज आपसे एक और प्रार्थना है। " "कहिए।" "महाराज यहाँ के पादरी हम पर बहुत अत्याचार करते रहे हैं। आपका कहना है कि किसी की धार्मिक भावना पर ठेस न लगने दें। परन्तु महाराज, ये पादरी यीसु का नाम लेकर हमारे साथ जानवरों जैसा बर्ताव करते हैं। धर्मान्तरण कराने के लिए इन्होंने हमारे घर-परिवार को जलाकर रख दिया। ईसाइयों के इन पादरियों का चरित्र भी कहाँ ठीक है? यीशु का नाम लेकर इन पादरियों ने बहुत धन इकट्ठा किया है। इनके सफेद वस्त्रों में मोमबत्तियाँ नहीं, धारदार कटारियाँ रखी हैं।" "बाबा! आपको क्या चाहिए?" "हम किसी को उँगली से भी नहीं छुयेंगे। पर कल मडगाँव के अत्याचारी पादरियों के चोंगे उतारकर उनके सिर पर बाँधेंगे और उनका जुलूस निकालेंगे। बस और कुछ नहीं।" बूढ़े व्यक्ति की यह माँग सुनकर महाराज के साथ सभी लोग जोर-जोर से हँसने लगे। महाराज ने उनके आक्रोश को ठीक-ठीक समझा। मडगाँव में सचमुच धर्म के नाम पर बहुत अत्याचार हुआ था। महाराज ने जुलूस की अनुमति दे दी। किन्तु अनुमति देने के साथ ही उन्होंने कवि कलश को आदेश दिया— "इस खतरे की जवाबदारी आप पर है। जुलूस के साथ सेना की एक विशेष टुकड़ी भेजिए। किसी चर्च की इमारत अथवा किसी धर्मगुरु के प्राणों की कोई क्षति नहीं होनी चाहिए।" लोग सन्तुष्ट होकर वहाँ से चले गये। दूसरे दिन समाचार आया कि मडगाँव के पादरियों ने मराठों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। चर्चों के साथ ही उन्होंने सम्पत्ति को भी मराठों के हवाले कर दिया। चर्च पर क़ब्ज़ा लेते समय चर्च के बाहर कम से कम दो हजार फिरंगी वहाँ एकत्र हुए थे। मराठों ने सभी को शान्तिपूर्वक बाहर जाने दिया। आठ वाइसराय की पसलियों का घाव अब भी उसे पीड़ित कर रहा था। मांडवी के दूसरे किनारे पर 'हरऽ हरऽ महादेव' के नारे गूँज रहे थे। उस किनारे पर शम्भूमहाराज का घोड़ा निरन्तर घूम रहा था। रात में मराठा घुड़सवारों की तलवारें नारियल और सुपारी 484 . : सम्भाजी