छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंके बगीचों में चमकती दिखती थीं। कांट द आल्होर के साथ सम्पूर्ण पणजी शहर दहशत में आ गया था। पुर्तगाली सेना की भूख-प्यास बन्द हो गयी थी। पादरी भीतर ही भीतर बहुत भयभीत हो गये थे। वाइसराय की स्थिति ऐसी हो गयी थी जैसे कोई सियार अपनी माँद में बैठकर शिकारियों का हांका और शिकारी कुत्तों की आवाज सुनकर भय के मारे भीतर ही भीतर मरा जा रहा हो। थोड़ी-सी सेना और उससे कहीं अधिक अपनी कुशाग्र बुद्धि के बल पर उसने अब तक पणजी पर अपना अधिकार जमा रखा था। किन्तु पणजी वासियों का दबाव निरन्तर बढ़ रहा था। इसकी सूचना वाइसराय ने पुर्तगाल को भी दे दी थी। हिन्दुस्तान में पुर्तगालियों का शासन समाप्ति पर आ रहा था। चारों ओर वाइसराय और उसकी नीतियों को अन्यायपूर्ण ठहराया जा रहा था। थाना से लेकर गोवा तक फिरंगियों की प्रत्येक चौकी पर मराठों के आक्रमण हो रहे थे। उसी बीच चौल के गवर्नर फ्रांसिस द कोश्त का सन्देश आया— "यहाँ पर अँग्रेजों ने खुलेआम सम्भाजी की सहायता करनी आरम्भ कर दी है। वे मराठों को बन्दूकें तोपें, गोले, बारूद सब कुछ दे रहे हैं। दुगुना दाम देने पर भी हमें चुटकी भर भी बारूद नहीं मिल रही है। यदि समय से हमारी सहायता न की गयी तो हम मारे जायेंगे।" वाइसराय की पसलियों का घाव अभी भी भरा नहीं था। शम्भूमहाराज के भय से पणजी छोड़कर भाग रहे थे। वाइसराय और उसकी सेना से फिरंगियों का विश्वास उठ गया था। उस रात कांट ने दूरबीन से देखा। डरे हुए लोग बड़ी संख्या में दूसरी दिशा की ओर जा रहे थे। उसने अपने सचिव से पूछा, "मूर्खों की तरह वे लोग कहाँ जा रहे हैं?" "बॉमगेसू चर्च की ओर।" "इतनी रात को?" "जी सर, सेंट जेवियर पर इनकी अगाध श्रद्धा है। इनका विश्वास है कि इस भयानक संकट से इन्हें सेंट जेवियर ही बचा सकते हैं। सर मुझे भी लगता है..." सचिव कुछ डर गया। उसका वाक्य अधूरा ही छूट गया। "क्या?" "आप भी वहाँ जाकर सेंट जेवियर के सामने अपनी झोली फैलाएँ। सेंट जेवियर से की गयी प्रार्थना व्यर्थ नहीं जाएगी।" इस समय सेंट जेवियर की पुरानी चर्च फिरंगियों की शरणस्थली बन गयी थी। वहाँ पर एकत्र लोग दबी आवाज में सेंट जेवियर का नाम जप रहे थे। रात-दिन प्रार्थनाएँ चल रही थीं। फिरंगियों की आँखों के साथ मोमबत्तियाँ जल रही थीं। सम्भाजी :: 485