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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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रास्ते में पहुँच जाती तो मराठों का फिरंगियों और मुगलों के बीच फँस जाना निश्चित था। इसलिए सावंतवाड़ी की ओर जल्दी-जल्दी निकल जाना आवश्यक था। नौ बड़े परिश्रम से फौज पहाड़ की घाटी पार करके आगे बढ़ी। महाराज की सेना चांभार घाटी पार करके रायगढ़ की ओर मुड़ गयी। नाते गाँव के खेतों में अंग्रेजों का एक दल रुका हुआ था। उन्होंने उस जंगल में ही अपने दस-बारह तम्बू खड़े कर लिए थे। वकीलों के साथ आये पाँच सौ बन्दूकधारी सैनिक उनके चारों ओर पहरा दे रहे थे। मुम्बई में पैदा हुए आलीशान घोड़ों पर गहरे लाल रंग के टोप लगाए, कम्पनी सरकार के सैनिक डटकर पहरा दे रहे थे। शम्भू महाराज की विशाल सेना पहुँचते ही अंग्रेजों का वकील स्मिथ साहब झट से बाहर आया। अपने हाथ में टोपी को पंखे की तरह हिलाकर उसने शम्भू महाराज का झुककर अभिवादन किया। पिछले कई दिनों से वह शम्भू महाराज की प्रतीक्षा कर रहा था। स्मिथ के आग्रह पर शम्भू महाराज कुछ समय के लिए वहाँ रुके। स्मिथ के डेरे में विचार-विमर्श आरम्भ हुआ। रामचन्द्र शेणवी दुभाषिये का कार्य कर रहे थे। स्मिथ साहब ने कहा, "महाराज, आप गोवा में अटक गये और हमें मुम्बई में अटका दिया।" "सो कैसे?" "अब क्या सब कुछ मुझे ही कहना पड़ेगा महराज? आपके दरिया सारंग, भयानक भंडारी और निलोपन्त पेशवा ने कई जहाजों के साथ एक बड़ी नौ सेना खड़ी कर ली है। आप तो इस समय मुम्बई पर भी आक्रमण करने की बात सोच रहे हैं।" "इस बात का मुझे कुछ भी पता नहीं है।" ऐसा कहकर महाराज ने बात को टालना चाहा। "महाराज! आपसे पूछे बिना वे एक भी कदम समुद्र में नहीं बढ़ सकते। वकील होने के नाते इसकी थोड़ी बहुत कल्पना तो है। हमारे मालिक कमिश्नर 488 :. सम्भाजी