छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंघमासान युद्ध एक अहमदनगर के किले में औरंगजेब बहुत बेचैन था। कोंकण में पहुँचे शहाबुद्दीनखान और गोवा की ओर गये मुअज्जम दोनों के रास्ते में उसकी आँखें टकटकी लगाए थीं। घोड़ों और साँड़िनियों के सवार जल्दी जल्दी समाचार ले आ रहे थे। उद्विग्न बादशाह अपने महल के ऊपरी छत के पास की दालान में बैठा रहता था। वहाँ से किले का सिंहद्वार दिखाई पड़ता था। जब कोई हरकारा या साँड़नी द्वार पर आये और तब उसका सन्देशा ऊपर पहुँचाया जाय, इतनी प्रतीक्षा का धैर्य बादशाह में नहीं था। इसलिए बादशाह के नौकर आये हुए हरकारों को तत्काल ऊपर भेजने के लिए नीचे दौड़ते हुए जाते थे। बादशाह को दृढ़ विश्वास था कि इस तीसरे आक्रमण में शहाबुद्दीन अवश्य ही विजयी होगा। रात में बादशाह ने बहुत देर से खाना खाया। उससे पहले दूर दूर से आये गुप्तचरों से प्राप्त समाचारों पर सूक्ष्मता से चिन्तन करता रहा। अपने मुलायम बिस्तर पर लेटते ही वह गहरी नींद में सो गया। वह बहुत देर से अचानक उठा। निचली मंजिल से कुछ शोरगुल सुनाई पड़ा। बादशाह बड़ी चपलता से छोटे बच्चे की तरह बिस्तर से नीचे कूदा और पास में रखी धारदार नंगी तलवार लेकर घबराया हुआ झरोखे से नीचे देखने लगा। हाथ में कोई बहुत महत्त्वपूर्ण लिफाफा लिये असदखान खड़ा था। वह मुख्य दरवान से बादशाह का जगाने का आग्रह कर रहा था। “यह कैसे मुमकिन है, वजीरे आजम ? बादशाह के इतने शहजादे पैदा हुए, उस समय भी यह खुशखबरी देने के लिए उनकी नींद खराब करने की हिम्मत किसी ने नहीं दिखाई—और आप ....?” “क्या बात है वजीरे आज़म ?” बादशाह ने कड़कते हुए पूछा। सम्भाजी :: 491