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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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"एक बहुत महत्त्वपूर्ण सन्देश-शहाबुद्दीन के पास से।" "आवो, ऊपर आ जावो।" बादशाह का संकेत पाते ही वजीर शीघ्रता से बादशाह के शयनकक्ष में पहुँच गया। तब तक बेगम उदयपुरी और दूसरी बहू बेटियाँ वहाँ पहुँच गयी थीं। बादशाह की दृष्टि जल्दी-जल्दी पत्र पर घूम गयी। वह खुशी से हँसा। उसने सोचा कि इस समाचार को राजपरिवार के अन्य लोगों को बताने में कोई हर्ज नहीं है। इसलिए उसने पत्र वजीर को दे दिया। वजीर ऊँची आवाज में पढ़ने लगा-"मेरे आका यह केवल बादशाह और खुदा की रहमत है। मैं सह्याद्रि की कठिन घाटी देवघाट को पार करने में सफल हो गया हूँ। रास्ते में सम्भाजी की गश्त लगाने वाली सेना की टुकड़ियों को मैंने जलाकर खाक कर दिया है। सैकड़ों मरगट्ठों और उनके जानवरों का कूर्मा बना दिया है। राहेरी की वाड़ी में यह शैतान सम्भा छुपा है, यह खबर मुझे मिली। तुरन्त मैं उस जहन्नमी का पीछा करते हुए उस ओर बढ़ा। मराठों के किले की तलहटी में बसी बस्ती को मैंने दिन में ही जला दिया। यह मुसीबत उसका अन्त कर देगी यह मूर्ख सम्भा के ध्यान में आ गया। वह काफिर तुरन्त बनबिलाव की तरह उछलकर भाग गया। अपनी जान किसी तरह बचाते हुए सम्भा रायगढ़ किले पर भाग गया है।" बादशाह को बड़ा सन्तोष मिला। इस सन्दर्भ में उसने अपने शाही बावर्ची को सभी के लिए शर्बत और ठंडाई ले आने के लिए आदेश दिया। यह इस तरह के पेयपान का समय नहीं था। किन्तु शहंशाह की खुशी ही तो खुदा की मेहरबानी थी। सभी ने शर्बत ग्रहण किया। बांदशाह की आँखें आनन्द से चमक रही थीं। उनमें नशा छाया हुआ था। उसके मन की आँखों के आगे कुहरे में ढके रायगढ़ की कठिन चढ़ाई और साहसपूर्वक चढ़ते हुए शहाबुद्दीन के बहादुर सिपाही दिखाई देने लगे। उसने प्रसन्न होकर सभी को सम्बोधित किया-"शहाबुद्दीन हमारे खजाने का रत्न है। उसको हम इसी समय 'फिरोजजंग' अर्थात् 'युद्धरत्न' की उपाधि देते हैं।" बादशाह की इस घोषणा से सभी प्रसन्न हो गये। अगले चार-पाँच दिनों में शहाबुद्दीन का दूसरा पत्र आया। "मैंने पाचाड़, रायरी आदि पर आक्रमण करके अब रायगढ़ से केवल दो कोस की दूरी पर डेरा डाल दिया है। सम्भा ने शक्तिशाली सरदार रूपा भोसले और हंबीरराव को बहुत बड़ी फौज के साथ भेजा था। बाण और बन्दूकों की भयंकर लड़ाई हुई। हमारे जोरदार आक्रमण से शत्रु सेना भाग खड़ी हुई। हमने सात कोस तक उनका पीछा किया। अन्त में बादशाह की फतह हुई।" इस पत्र को सभी के सामने पढ़ा गया। बादशाह ने सभी को इस खुशी का आनन्द मनाने दिया। बादशाह ने तकलीया' कहकर बैठक समाप्त की और सभी को 492 :. सम्भाजी