छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंदो गोवा की सीमा पर बाँदा गाँव में बड़ी अशान्ति फैली थी। शहजादा मुअज्जम की विशाल फौज ने वहाँ डेरा डाल रखा था। इसलिए उस गाँव का स्वरूप ही बदल गया था। शहजादा कांट द आल्होर की राह देख रहा था। वाइसराय को तत्काल आकर मिलने के लिए उसने सन्देशा भेजा था। चार दिन तक प्रतीक्षा करने के बाद भी वाइसराय का आगमन नहीं हुआ। अन्ततः उसने अपने वकील अल्बुकर्क को भेज दिया। किसी मामूली वकील के साथ औरंगजेब के शहजादे का समझौता करना असंभव था। मुअज्जम बहुत रुष्ट हुआ। किन्तु समय ऐसा था कि शिकायत करें भी तो किससे ? अल्बुकर्क कन्धे झुकाए सामने खड़ा था। उसकी लाल शेरवानी और लम्बी टोपी की ओर शहजादे ने क्रोध से देखा। मुअज्जम गुर्राया, “तुम्हारा वाइसराय अपने आप को क्या समझता है ? उसको कुछ शिष्टाचार, अदब, तमीज है कि नहीं ?” “माफी हो सरकार ! वाइसराय बीमार हैं।” “ये झूठे बहाने बन्द करो। वह सम्भा बीस हजार की फौज लेकर तुम्हारी गर्दन पर सवार था, तब जहाज मे बैठकर भागना पड़ा था, तुम्हारे इस कांट साहब को। चर्च के तलघर में बाप दादो के मुर्दों के सामने फूट-फूटकर रोना पड़ा था तुम लोगो को। वे दिन तुम लोगो को भूल गये हैं क्या ?” “हुजूर माफी चाहता हूँ।” “उस सारे संकट से किसने बचाया ? मुगल फौज ने ही न ?” “हुजूर नाराज न हों। पुर्तगालियों और मुगलों की यारी दोस्ती आगे भी पहले जैसी ही रहेगी। बताइए हमें मुगलों की क्या सेवा करनी है ?” “सूरत से आये हमारे जहाज कितने दिनों से समुद्र मे खड़े हैं ? समझौते के अनुसार हमारी नौसेना के लिए पणजी में तत्काल व्यवस्था कीजिए।” “जगह की व्यवस्था बाद में देख लेंगे हुजूर। पहले जहाजों पर लदे रसद को तो उतरवाइए।” अल्बुकर्क ने समझाते हुए कहा। “ठीक है। हम कल ही अपनी जहाजों को माडवी में उतरने का हुक्म देते हैं।” “सरकार, सरकार—मांडवी के इतने चौड़े पाट में क्यों जाते हैं ? कांट साहब की इच्छा है कि आप अपनी जहाजों को कायसूव नदी में उतारें।” पुर्तगाली वकील के उस स्वार्थपूर्ण कथन से शहजादा उत्तेजित हो गया। अपने पतले ओठों को दाँतों से दबाते हुए वह ऊँची आवाज में बोला, “तुम्हारा सम्भाजी :: 499