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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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वाइसराय मुझे बदमाशों का सिरताज दिखता है। मांडवी में जहाजों को उतारने से तुम्हारे मालिक को पणजी शहर के लिए खतरा लग रहा है? गिरगिट की तरह रंग बदलने और साँप की तरह समय आने पर पलट जाने में माहिर है तुम्हारा वाइसराय। मुझे तो लगता है कि हमारे अब्बाजान औरंगजेब साहब को भी वाइसराय से बहुत कुछ सीख लेना चाहिए। " जिनकी सहायता के लिए मुगल इतनी दूर आए, उन फिरंगियों द्वारा ऐसा स्वागत किया जाएगा, ऐसी कल्पना शहजादे को नहीं थी। रामदरा को पार करके सावंतवाड़ी में प्रवेश करते ही मराठा फौज ने उसे जगह-जगह पर बहुत परेशान किया था। उसका बदला लेने के लिए ही वह सावंतवाड़ी, बाँदा, वंगुर्ला तक गोवा और हिन्द स्वराज्य की सीमा के गाँवों को जलाता हुआ आ रहा था। सम्भाजी महाराज की दहशत से भयभीत वाइसराय अब मन से समझौता और शान्ति चाह रहा था इसलिए शीघ्रता से पुर्तगालियों ने सम्भाजी से समझौता कर लिया। बसई और दमण के लिए चौथ कर देना स्वीकार कर लिया। इसके अतिरिक्त कांट ने लिखित रूप में स्वीकार किया था कि वे अपने क्षेत्र में मुगलों को, औरंगजेब की फौज के लिए रसद और गोला बारूद नहीं ले जाने देंगे। यह सारा ममाचार सुनकर शहजादा ने क्रोधित होकर पूछा, "सम्भाजी विजयी हो गया क्या?" प्रतिशोध की भावना से शहजादा अन्धा हो रहा था। साथ ही उसे शहजादा अकबर के डिचोली में होने की सूचना मिल गयी थी। उसने तत्काल छोटे से सुन्दर डिचोली गाँव पर आक्रमण कर दिया। अकबर वहाँ पर रुका नहीं था। परन्तु मुअज्जम ने क्रुद्ध होकर सम्भाजी महाराज और कवि कलश के सुन्दर महलों को तोपों से ध्वस्त कर दिया। कवि कलश द्वारा बड़े परिश्रम से तैयार किया गया गुलाब का बगीचा हाथियों से रौंदवा दिया। शहजादे ने भतग्राम, नार्वे जैमे गाँवों को लूटा, पिलगाँव के राममन्दिर को ध्वस्त कर दिया, मप्तकोटेश्वर के मन्दिर का कलश तोड़ दिया। गोवा की सीमा पर जहाँ तहाँ ध्वंसलीला की। उसे खबर मिली कि शहजादा अकबर ने ईरान की ओर भाग जाने के लिए एक जहाज बनवाया है जो बेगुर्ला बन्दरगाह में खड़ा है। फिर क्या था मुअज्जम ने पूरे बन्दरगाह को जलाकर खाक कर दिया। परन्तु इस कार्य से उसने सूरत से आने वाली अपनो रसद को भी नष्ट कर दिया। होशियार कांट द आल्होर ने सम्भाजी महाराज के साथ लिखित समझौता कर लिया था। समझौते के कागजातों को पुर्तगाल भेजकर खतरे में पड़े अपने वाइसराय पद को सँभाल लिया था। पणजी के तटों पर नयी तोपें लगाई गयी थीं। सम्भाजी के डर से मार्मा गोवा भेजे गये कागजात फिर से पणजी ले आये गये थे। वाइसराय 500 :: सम्भाजी