छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहमसे ऐसी दहशत खायी है कि सोते समय भी 'संम्भाजी, सम्भाजी' कहकर बड़बड़ाता होगा।" "सुना है कि उन फिरंगियों ने आपके अनुसार समझौता कर लिया है?" "बिलकुल! एक बात अच्छी हुई येसू, अब औरंगजेब कोई भी चाल चले, जंजीरा आक्रमण में सिद्दियों की और गोवा आक्रमण में फिरंगियों की कमर हमने तोड़ दी है। आगे औरंगजेब चाहे जितना फुसलाये, वे खुलेआम उसके साथ आने का नाम नहीं लेंगे।" येसूबाई ने पूछा, "यहाँ आने से पूर्व ही यहाँ की खबरें आपके पास गोवा में कैसे पहुँचीं?" "कौन-सी खबर ? "यही कि रायगढ़ पर शहाबुद्दीन के आक्रमण का कविराज ने किस प्रकार सामना किया और किस प्रकार उसे यहाँ से खदेड़ा ?" कविराज का नाम आते ही महाराज का हृदय भर आया। उनकी आँखें चमकने लगीं। वे प्रसन्न होकर बोले, "सच कहूँ महारानी, कवि कलश की महिमा किसी दूसरे से सुनने की हमें आवश्यकता ही नहीं है। उनकी प्रेमपूर्ण निष्ठा और ईमानदारी का मूल्य हम दोनों के सिवा और कौन जान सकता है?" "दोनों कौन?" "जी हाँ! सम्भाजी के इस हृदय को और जिस भूमि पर हम आप खड़े हैं, उस मिट्टी को भी।" भोजन के बाद महारानी को राजा से कुछ कहना था। उन्होंने महाराज से कहा, "महाराज आपकी अनुपस्थिति में हमें एक कठोर निर्णय लेना पड़ा, राहुजी सोमनाथ, गंगाधर पन्त, वासुदेव पन्त और मानाजी मोरे को बन्दी बनाना था न?" "अँ हाँ", आश्चर्य से महाराज की ओर देखते हुए महारानी ने कहा, "हमारे कुछ श्रेष्ठ लोग शहाबुद्दीन से मिलने भुलसी घाट की ओर गये थे। स्वराज्य को क्षति पहुँचाना उनका उद्देश्य था। हमने अपने आदमियों को उनके पीछे लगाकर पहले स्थिति की जाँच की फिर इस प्रकार का निर्णय लिया। " गद्दारों की भीड़ के कारण महाराज और महारानी दोनों परेशान हो गये थे। पिछले कई महीने से शहाबुद्दीनखान गद्दारों के स्वागत के लिए दरवाजे खोलकर स्वागत के लिए तैयार बैठा था। पूना में आने के साथ ही उसने अनेक प्रतिष्ठित मराठों और ब्राह्मणों को बुलाकर और उनका हृदय परिवर्तन करके स्वराज्य द्रोह के लिए उन्हें तैयार किया था। इससे पहले ही कान्होजी शिर्के, यशवन्त दलवी, नागोजी माने जैसे जाने-माने मराठे मुगलों की नौकरी में चले गये थे। 502 · सम्भाजी