छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
पृष्ठ 524, कुल 793 में से
संदर्भ में पढ़ेंऔरंगजेब ने कुछ अधिक नहीं कहा। किन्तु बादशाह के इस आक्षेप से शहजादी बहुत पीड़ित हुई। उसने सुबक-सुबक कर रोना शुरू कर दिया। बादशाह का हृदय द्रवित हुआ। अपनी शहजादी के सिर पर प्रेम से हाथ फेरते हुए उसने भावुक होकर कहा, "बेटी तुम्हारी सच्ची मुहब्बत अपने अब्बा की तरह अपने मजहब—इस्लाम—से है। वह मुझे भी अच्छी तरह पता है। लेकिन जिन दो इस्लामी राज्यों के लिए तुम्हें दया आती है, जिनके लिए हमारे शेख काजी भी नाराज होते हैं, वे दोनों हुकूमतें काफिर की दोस्त और अल्लाह की दुश्मन हैं।" जीनतउन्निसा ने कुछ अविश्वास से अपने पिता की ओर देखा। उसी समय बादशाह ने एक पत्र निकाला। उसे शहजादी के सामने करते हुए बोला, "देख बेटी यह कुछ दिन पहले हैदराबाद के उस मूर्ख कुतुबशाह द्वारा बीजापुर के आदिलशाह को लिखा गया पत्र है। इसे हमारे जासूसों ने प्राप्त किया है। इसके मजमून को पढ़ो।" शहजादी की दृष्टि पत्र पर घूमने लगी। 'भाईजान सिकन्दर आदिलशाह, औरंग बादशाह ने शहजादा आजम को आपके राज्य में दबाव डालने के लिए भेजा है। किन्तु आप उसकी जरा भी चिन्ता न करें। मैं शीघ्र ही चालीस हजार की कुतुबशाही फौज आपकी सहायता के लिए भेज रहा हूँ। सम्भाजी राजा के हंबीर मामा, मिरज, अथणी, बारूगढ़, महिमानगढ़ से जत तक के प्रदेश में तहलका मचा रहे हैं। बादशाह की फौज को हैरान करके आपकी मदद कर रहे हैं, यह हमें भी मालूम है। दक्खन देश हमारी तीनों हुकूमतों को औरंगजेब को हैरान करके निश्चित रूप से यमुना के तट पर भगाना है। देखें यह दिल्ली का बूढ़ा हमारे दक्खिनी दिमाग के आगे कब तक टिकता है? आप जरा भी न घबराएँ। मैं और सम्भाजी राजा पूरी शक्ति से आपके पीछे खड़े हैं। आपका भाई तानाशाह अबुल हसन कुतुबशाह उस पत्र को पढ़कर शहजादी को असलियत समझ में आ गयी। समय से अपनी आँख खोल देने के लिए उसने अपने अब्बा बादशाह का आभार माना। शहजादी के समझ लेने पर बादशाह आनन्दित हुआ और रात को उसे बहुत देर से नींद आयी। किन्तु वह रात बादशाह के लिए सुखकर नहीं सिद्ध हुई। सवेरे सबेरे उसका मुख्य जासूस दरवाजे पर दस्तक देने लगा। बादशाह आँख मलते हुए उठा तो दरवाजे पर असदखान और बरामदखान को खड़ा पाया। बादशाह ने परिस्थिति की गम्भीरता का अनुमान कर लिया। उनको लेकर वह स्नानगृह में चला गया। घबराया हुआ वजीर बताने लगा, "बादशाह सलामत, बहुत बुरी खबर है।" 522 :: सम्भाजी