छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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गोलकुंडा और भागानगरी का ऐश्वर्य और वैभव ऐसा था कि उसकी तुलना स्वर्ग से की जाती थी। पास के हैदराबाद शहर की शानो शौकत भी बेजोड़ थी। हमेशा की तरह कुतुबशाह अबुल हसन सन्ध्या समय से ही नाच गान आनन्द में डूबा हुआ था। भरे दरबार में सारंगी बजाना उसे बहुत अच्छा लगाता था। गुणीजन उसकी प्रशंसा करते थे। किन्तु शुष्क राजनीति में उसका मन जरा भी नहीं लगता था। भागानगर के क्षेत्र में असंख्य तालाब थे। उस क्षेत्र में अनेक छोटे मोटे बाँध बाँधे गये थे। भरपूर फसलों और फलों के बगीचों के कारण गोलकुंडा की कुतुबशाही में कमाल की समृद्धि आ गयी थी। मूसी नदी के किनारे बसे हैदराबाद नगर में चौड़ी चौड़ी सड़कें बनी थीं। औरंगजेब को गद्दी पर बैठे तेईस-चौबीस वर्ष हो चुके थे। इतनी लम्बी अवधि में कुतुबशाही पर कोई भी आक्रमण नहीं हुआ था। इसलिए यहाँ की समृद्धि निरन्तर बढ़ती गयी। आज भी महफिल में बड़ी रौनक आयी थी। ऊँची नक्षीदार ईरानी वेशभूषा और पट्टेदार किमाँश में तानाशाह का व्यक्तित्व बहुत आकर्षक लग रहा था। उसके किमाँश के तुर्रे में जड़े माणिक्य के चाँद सितारों की चमक विलक्षण आभा से मंडित थी। स्वर्ग की अप्सराओं की भाँति सुन्दर युवतियाँ उसके आसन के सामने नृत्य कर रही थीं। तानाशाह का काल साहित्य, सौन्दर्य, नृत्य आदि की दृष्टि से स्वर्णकाल लग रहा था। हैदराबाद और भागानगरी में बीस हजार से अधिक गणिकाएँ, तवायफे और नर्तकियाँ रहती थीं। प्रत्येक शुक्रवार को राजमहल के भव्य चौक में हजार हजार नर्तकियाँ अपनी कला प्रदर्शित करती थीं। अलिन्द में बैठकर तानाशाह इस स्वर्ग सुख का आनन्द लूटता था। पूरे हैदराबाद का वातावरण रसीला और नशीला था। पिछले अनेक वर्षों से तोपों और बन्दूकों की आवाज सुनाई नहीं पड़ी थी। वहाँ तबले, हारमोनियम की आवाज और घुँघरुओं की छनक रोज सुनाई पड़ती थी। गन्धक और तोप गोले बारूद के व्यापारी विनाश के कगार पर थे। लेकिन मोगरे की बेड़ियाँ बेचने वालों ने अपने महल खड़े कर लिये थे। हर रोज की तरह आज भी तानाशाह राजमहल की सन्ध्या महफिल में नशे से बेहोश हो रहा था। उसी समय मजबूत कदकाठी के, गौर कान्तियुक्त प्रशस्त भाल पर चन्दन का तिलक किये मादण्णा ने वहाँ प्रवेश किया। जरीदार वस्त्रों में सुशोभित मादण्णा हैदराबाद के प्रधानमन्त्री थे। जाति से एक दक्खिनी वैष्णव ब्राह्मण
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