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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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होने पर भी वे इस्लामी राज्य के प्रधानमन्त्री बने थे। राज्य में उनका पद यद्यपि दूसरे क्रम पर था फिर भी व्यवहार में वे कुतुबशाह के सारे अधिकार का उपयोग करते थे। इसलिए मुसलमान प्रजा उनसे बहुत नाराज रहती थी। अपनी बौद्धिक कुशलता के कारण ही मादण्णा इतनी ऊँचाई तक पहुँचे थे हिन्दी, तेलगू और पर्शियन भाषाओं पर उन्हें पूर्ण अधिकार था। सोने की पालकी में मादण्णा हैदराबाद में घूमते थे। उनकी पालकी को दूर से ही देखकर, शहर के बड़े व्यापारी, विद्वान हिन्दु और मुसलमान सभी उनके आगे आदर से झुक जाते थे। तानाशाह ने अपने एक सामान्य किन्तु बहुत होशियार गेशकार को प्रधानमन्त्री बनाया था। अपने प्रभाव का फायदा उठाकर मादण्णा ने इस्लामी सल्तनत की आय से अनेक हिन्दू देव देवियों के मन्दिर बनवाये थे। गोलकुंडा कुतुबशाह से मिलने आये। शिवाजी महराज के साथ अनेक फिरंगी वकीलों की भी पूरी खातिर की गयी थी। विगत तेरह चौदह वर्षों में भूलकर भी रंगमहल में पैर न रखने वाले मादण्णा को वहाँ आया देखकर सारी नृत्य सभा स्तब्ध रह गयी। सारंगियाँ बन्द हो गयीं। सभी नृत्यांगनाओं के छनकते घुँघरू भी मौन हो गये। तानाशाह भी कुछ आश्चर्यचकित होकर अपने प्रधान की ओर देखने लगा। हुक्के की नली मुँह से बाहर निकालते हुए नशे की स्थिति में ही प्रश्न किया— “क्यों मादण्णा आपको किसलिए प्रधानमन्त्री बनाया है? हमारी नृत्य-संगीत और इश्कबाजी की गतिविधियों में किसी भी प्रकार की अडचन न आए, इसीलिए न?” “खाविन्द, यदि इस बन्दे से कोई भूल हुई तो दया करें। परन्तु बिना कोई बहुत जरूरी काम पड़े मैं आपको कष्ट देने का साहस कैसे करता?” “बोलो।” “हजरत, दिल्ली के बादशाह औरंगजेब की ओर से एक जरूरी फरमान आया है।” “क्या कहता है वह बुड्ढा?” तानाशाह हड़बड़ी में बोला, “जल्दी बताइए। ये नटखट शर्मीली लड़कियाँ अपने तोड़े को तोड़कर किस प्रकार रुक गयी हैं। उधर तबले की लय के साथ मेरे हृदय की लय भी बीच में ही किस प्रकार बिगड़ गयी है खुद ही देखिए। यह जरूर है कि यहाँ के गायन, वादन और यहाँ की गमिकता वह औरंगजेब क्या समझेगा?” “हुजूर! हुजूर! उनका कहना है कि—बीजापुर के आदिलशाह की मदद करने का गुनाह आपने यदि किया, तो...” “तो? ऐसे घबराते क्यों हैं? बताइए।” “अगर बीजापुर वालों की थोड़ी-सी भी मदद करोगे तो आपका तख्त और 526 सम्भाजी