छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंताज गन्दी नाली में फेंक दिया जाएगा।" यह खबर सुनाते हुए मादण्णा बहुत घबरा गये थे। किन्तु तानाशाह ने मजाक में लेते हुए अपनी आँखें उठाईं। मादण्णा पर उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि बादशाह के फरमान का उन पर कोई प्रभाव नहीं है। अपनी अय्याशी में विघ्न पड़ने से तानाशाह बेचैन हो गया था। एक गुलाम ने तानाशाह को एक पान का बीड़ा दिया। सुदूर मछली पट्टम की एक विशिष्ट पनवाड़ी से हरे पीले रंग के पान तानाशाह के लिए लाये जाते थे। उस कोमल पान बीड़े को चबाते हुए सोने के पीकदान में पीक थूकी। उसने एक सोलह सत्रह साल की रूपवती लड़की को अपने पास बुलाया। उसके प्रत्येक अंग से यौवन झलक रहा था। तानाशाह उसके सिर को अपनी जाँघ पर रखकर उसकी रेशमी अलकों में उँगलियाँ फेरने लगा। उसने पुनः पूछा- "क्या कहता है वह तुम्हारा औरंगजेब ?" मादण्णा ने डरते-डरते उसी पैगाम को फिर से दुहराया। तब तानाशाह ने पूछा- "मादण्णा, हैदराबाद और गोलकुंडा में अपनी कितनी फौज तैनात है?" "लगभग एक लाख।" "ओह ! तो ऐसा करो, आज ही बीस हजार घुड़सवार सेना बीजापुर की मदद के लिए भेज दो। वह बेचारा सिकन्दरशाह, अभी उसकी पन्द्रह वर्ष की नाजुक उम्र, अपने इस पड़ोसी की हर कीमत पर मदद करना हमारा फर्ज है।" इसी समय वहाँ कुतुबशाह की बेगम सरोभाजानी आ गयीं। बेगम के खुद वहाँ अचानक आ जाने से तानाशाह के अगल बगल बैठी एवं हाथ-पैर दबाती नर्तकियाँ तितलियों की तरह उड़कर निकल गयीं। बेगम को वहाँ देखकर तानाशाह गुर्राया, "क्या चाहती हो बेगम ?" "फर्याद।" अपने नीले घूँघट से सामने देखते हुए बेगम ने कहा, "माफ कीजिए हजरत, इस सल्तनत के इतने बुरे दिन आ गये हैं कि अपने राज्य और परिवार की ओर ध्यान देने के लिए कुतुबशाह को एक क्षण की भी फुर्सत नहीं है। इसीलिए अपने पति को मिलने के लिए बेगम को भी बेशर्म होकर इस रंडीखाने में आना पड़ता है।" "सिर्फ काम की बात करो, सुनाओ अपनी फर्याद।" सरोभाजानी बेगम रुकी ! वहाँ पर खड़े मादण्णा पंडित की ओर जलती हुई दृष्टि डालकर बोली, "यह फर्याद सुनाते ही यहाँ की वेश्याएँ चली गयीं किन्तु यह मांदण्णा पंडित यहीं बना है।" "यह कैसे मुमकिन है बेगम ? मादण्णा कैसे जा सकता है? मादण्णा हमारी छाया है, हमारी जान है।" "वही आपकी जान ले रहा है।" बेगम ने व्याकुल होकर कहा, "आपने सम्भाजी :: 527