छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअपना सारा कारोबार अन्धे की तरह इस मादण्णा पंडित को सौंप दिया है। वही आपका गला घोंट रहा है। अपने भाई आकण्णा को इसने प्रधान सेनापति बनाया है। इसका भतीजा राजकर्मचारियों का प्रधान है। राज्य के सभी बड़े ओहदे इसने अपने लोगों में बाँट रखे हैं। इसीलिए हैदराबाद की सारी इस्लामी प्रजा विरोध कर रही है। इस सारी विपत्ति के मूल कारण आप हैं। स्वामी इसका ध्यान आपको है कि नहीं?'' तानाशाह ने अपनी वक्रदृष्टि मादण्णा की ओर घुमाई। मादण्णा से पूछा, "दीवान मादण्णा, दरबार के सारे उमराव और राज्य के सभी उलेमा आपकी यही शिकायत करते रहे हैं। मैं जब से इस राजगद्दी पर आया हूँ, पिछले तेरह-चौदह वर्षों में कभी एक भी सवाल आपसे नहीं किया। आज सिर्फ एक सवाल— "जैसी आपकी आज्ञा महाराज।" थरथर काँपते मादण्णा बोला। "हमारी बेगम साहिबा ने भरे दरबार में आप पर जो इल्जाम लगाए हैं, उनमें कौन-सा इल्जाम गलत है?" तानाशाह के इस धारदार सवाल से मादण्णा की जबान रुक गयी। वह घुटने के बल बैठते हुए बोला, "हुज़ूर इसमें कुछ भी गलत नहीं है। परन्तु हुज़ूर यही एक प्रश्न पिछले पन्द्रह वर्षों में एक बार पूछकर मेरे कान ऐंठे होते तो हमें अकल आ गयी होती। मैं पहले गरीब ब्राह्मण। उसके हाथ में आ गयी इतनी बड़ी सत्ता—फिर क्या था? रिश्तेदारों के पंख उग आए। यहीं सारी गड़बड़ी हुई।" तानाशाह बहुत मर्माहत हुआ। पास में रखी सुराही से उसने मदिरा के कई घूँट एक साथ पिये। उसने विषादपूर्ण स्वर में कहा, "यार मादण्णा, तुम्हारा भी क्या दोष? सत्ता एक बहता दरिया है। पानी की इस खलखलाहट को सत्ताधीश को ही रोकना होता है। तुम्हारे इस मालिक ने यदि बीच बीच में इस रंडीखाने से अलग होकर अपने दरबार में बैठने का गुनाह किया होता तो हमारी मूर्ख जिन्दगी को यह दिन क्यों देखने पड़ते?" सात बादशाह की विशाल छावनी रात के अँधेरे में सोई पड़ी थी। केवल पहरे पर खड़े सिपाही जाग रहे थे। कुतुबशाह और आदिलशाह का नशा उतारने के लिए बादशाह ने सोलापुर के पास, भीमा नदी के किनारे में डेरा डाल रखा था। उसने मुअज्जम को 528 :: सम्भाजी