छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
पृष्ठ 533, कुल 793 में से
संदर्भ में पढ़ेंआठ अहमदनगर किले का चाँदनी बाग केवल महिलाओं के उपयोग के लिए था। बादशाह की शहजादियाँ, छोटे बच्चे, नाती-पोते एवं छोटी बच्चियाँ इसमें खूब आनन्द लूटते थे। विशेष रूप से बादशाही बेगम जीनतउन्निसा इस बाग में मनचाहा आनन्द उठाती थी। जीनतउन्निसा और कमलजा में बड़ा प्रेम था। कमलजा बादशाह के कट्टर दुश्मन सम्भाजी की कन्या होने पर भी शहजादी की प्रिय सहेली थी। यह बात किले के सभी लोगों को और फौज को भी मालूम थी। जीनतउन्निसा ने उत्तर में ही अच्छी घुड़सवारी सीख ली थी। घोड़ा देखते ही कमलजा की बाँहें भी फड़कने लगती थीं। राजबन्दियों के बच्चो को घुड़सवारी सिखाना, बादशाही फौज के अनुसार अपराध था। किन्तु कमलजा के साथ जीनत के प्रगाढ़ प्रेम के कारण नियम का उल्लंघन किया जा रहा था। जीनत अपने साथ कमलजा को घोड़ा दौड़ाने देती थी। कमलजा भी केवल उसी के साथ लड़कियों वाले खेल खेलती थी। एक दोपहर को लड़कियाँ चाँदनी बाग में खेल रही थीं। कमलजा जोर से घोड़ा दौड़ा रही थी। बाकी सहेलियाँ चिल्ला-चिल्लाकर उमे प्रोत्साहित कर रही थीं। उसका घोड़ा अर्धचन्द्राकार घूम रहा था। चौथाई कोस की दूरी तय करके वापस आता था। उस ओर के बुलन्द दरवाजे पर 500 की सेना तैनात थी। वे भी आज शिथिल हो गये थे। स्वयं शहजादी और उसकी सहेलियों का खेल चालू रहने से वे भी निश्चिन्त थे। फूलों के पौधों की ओट से उन्हें लड़कियों की तालियाँ सीटियाँ सुनाई दे रही थीं। इसी बीच कमलजा के घोड़े ने बाग के बाहर छलाँग लगाई। पलक झपकते झपकते घोड़ा तेजी से पहरेदारों की आँख से ओझल हो गया। उसके पीछे 'भागोऽ भागोऽ, पकड़ोऽ पकड़ोऽ' की आवाजें सुनाई पड़ने लगीं। घुड़सवार सैनिक सावधान हुए। सैनिकों की टोली दरवाजे से बाहर निकली। जनानखाने का मुख्य रक्षक जैनुद्दीन बहुत साहसी और हट्टा कट्टा योद्धा था। उसने घोड़े की लगाम ढीली छोड़कर उसे खूब तेज दौड़ाया। कमलजा का घोड़ा कहीं दिखाई नहीं दे रहा था। जैनुद्दीन हैरान हो गया। कमलजा की आँखों के आगे रायगढ़ का शिखर और अपने पिता शम्भूमहाराज के महल का कलश दिखाई पड़ रहा था। इन्हीं दोनों चीजों को देखने के लिए कितनी रातें जागती रही थी। इसी के लिए वह बेचैन थी। जैनुद्दीन समझ गया कि सम्भाजी :: 531