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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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गया था। तब भी शम्भूमहाराज ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने राजापुर और गोवा के पुर्तगालियों से अनाज की माँग की थी। किन्तु पिछले अनेक वर्षों में मराठों और औरंगजेब की बीच दक्षिण के पठारों और सह्याद्रि की पहाड़ियों में युद्ध चल रहा था। सूखे के कारण नदियाँ सूख गयी थीं, कुओं में कहीं भी पानी नहीं था, गाँवों के तालाबों में पानी की जगह सिर्फ मिट्टी बची थी। मनुष्यों को ही पीने का पानी उपलब्ध नहीं था तो पशुओं के लिए कहाँ से आता। रायगढ़ पर चारों ओर से खबरें आती थीं। सामान्य जनता का दुख सुनकर शम्भूमहाराज का कलेजा हिल जाता था। महाराज ने सबसे पहले प्रजा से होने वाली कर वसूली रोक दी। ऐसे भयानक अकाल के समय प्रजा से कर वसूलना गरीब प्रजा की लाज ढकने वाली लँगोटी उतारने जैसा था। प्रजा के लिए राजा ने अनेक सुविधाएँ भी प्रदान कर रखी थीं। शम्भूमहाराज ने रायगढ़ पर अपने अष्ट प्रधानों और सेना के अधिकारियों की एक विशेष बैठक बुलाई। पेट का विकट प्रश्न था। शम्भूमहाराज ने सबसे पहले प्रश्न किया, “सभी मनुष्य और पशु समाप्त हो जाएँगे तो राज्य किसके लिए करना ?” उन्होंने म्हालोजी घोड़पड़े से पूछा। “बताइये घोड़पड़े काका, इस भयंकर अकाल का इलाज क्या है?” वृद्ध म्हालोजी ने आकाश की ओर देखा। वरुण देवता को प्रणाम किया। फिर कहा, “यह सच है कि वर्षा हमसे रूठ गयी है। परन्तु हमारे लोग भी निष्ठापूर्वक हमारी मदद कहाँ कर रहे हैं?” “मतलब ?” महाराज ने प्रश्न किया। दक्षिण से हरजीराजा की ओर से आने वाली रसद बीच-बीच में निरन्तर खंडित होती रही है। जिस उद्देश्य से महाड़िक को दक्षिण की सूबेदारी दी गयी थी उसकी पूर्ति वे नहीं कर रहे हैं।” “चिक्कदेवराजा की ओर से निश्चित की गयी वसूली आयी नहीं। उन्होंने सालाना द्रव्य भेजना उन्होंने स्वीकार किया था।” रामचन्द्रपन्त ने स्मरण दिलाया। “रसद की बात तो अलग रही, चिक्कदेवराजा हमारे शत्रु से मिला हुआ है। बीजापुर को घेरने के लिए आलमगीर की मदद के लिए उसने सेना भेजी है। चौदह-पन्द्रह हजार अच्छे घुड़सवार औरंगजेब की विजय के लिए बीजापुर वालों का रक्त बहा रहे हैं। बीजापुर के सिकन्दर आदिलशाह के इस पत्र को पढ़िए न महाराज!” खंडो बल्लाल ने ध्यान आकर्षित करते हुए कहा। सम्भाजी महाराज ने वह लिफाफा तुरन्त नहीं खोला। उन्होंने बड़ी बेचैनी से कहा, “दक्षिण के चिक्कदेवराजा को मुगलों की इतनी चिन्ता क्यों है? इतनी सहायता यदि किसी दक्षिण वाले ने दक्षिण वाले की होती तो? तो इतिहास चक्र ५०४ सम्भाजी