छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
पृष्ठ 537, कुल 793 में से
संदर्भ में पढ़ेंबदल गया होता।" खंडो बल्लाल और येसूबाई ने दक्षिण की आय का अंदाजपत्रक महाराज के, सामने प्रस्तुत किया। सत्रह वर्ष का सन्ताजी घोडपड़े व्यग्रता से लड़खड़ाते हुए बोल पड़ा, "महाराज दक्षिण की खबरों को ठीक नहीं कहा जा सकता।" "क्यों? क्या हुआ?" "पिछले महीने जिंजी के किले पर आठ दिन तक रोशनी सजाई गयी थी।" "किसलिए?" "हम स्वतन्त्र हो गये हैं। महाराज की पदवी धारण करने क लिए दरबार बुलाया था। हमारे हरजी राजा ने।" "हमारे कानों तक भी वे बातें आयी हैं।" कहते-कहते शम्भूमहाराज रुक गये। फिर वे उदास होकर बोले, "जीजाजी झूठ बोल रहे हैं। यह मुझे भी पता है। जिंजी में ऐसा कुछ नहीं है।" बहुत समय तक विचार विमर्श हुआ। महाराज ने सभी के विचारों को समझा। "आज औरंगजेब ने बीजापुर को घेर लिया है। कल वह गोलकुंडा की ओर मुड़ जाएगा। और फिर पहला, दूसरा और तीसरा हम मराठों को समाप्त किये बिना वह चुप नहीं बैठ सकता।" सभी ने आश्चर्यचकित भाव से महाराज की ओर देखा। महाराज ने जोर देकर कहा, "बादशाह के विरुद्ध दक्षिण के राज्यो का एक संघ बनाने का हमने पहले ही बीड़ा उठाया है। मैसूर और तमिल प्रदेश में शान्ति बनाए रखने के लिए हमे एक बार पुनः दक्षिण पर आक्रमण करना ही होगा। इसके अतिरिक्त दूसरा उपाय ही नहीं है।" "शम्भूमहाराज युद्धों से घिरे होने पर यह तरीका ज्यादा खतरनाक हो सकता है।" म्हालोजी बाबा ने कहा। "चुपचाप बैठे रहने पर भी औरंगजेब से आने वाला संकट टलेगा नहीं। दो चार महीने में ही कृष्णा में नयी बाढ़ आएगी। तब तक बादशाह निश्चित रूप मे बीजापुर में उलझा रहेगा। इसी बीच दक्षिण में कूद जाना चाहिए।" शम्भूमहाराज ने कहा। अपनी चौदह हजार की घुड़सवार सेना लेकर शम्भूमहाराज दक्षिण की ओर निकल गये। शम्भूमहाराज के दक्षिण आगमन से चिक्कदेवराजा को पसीना छूटने लगा। उसने अपनी सबसे अच्छी फौज औरंगजेब की सहायता के लिए भेजी थी। इससे उसकी चिन्ता और भी बढ़ गयी। उसे बच-बचकर लड़ाई करनी पड़ रही थी। महाराज ने चिक्कदेवराजा द्वारा जीता गया बीजापुर का क्षेत्र अपने कब्जे में कर सम्भाजी 535