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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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केन्द्रित की। उसने मुअज्जम को हैदराबाद से बीजापुर बुला लिया। विगत डेढ़ वर्षों की कोशिश के बावजूद बीजापुर की तटबन्दी में दरारें नहीं पड़ पायीं। किन्तु बादशाह को तो उसे हर हालत में तोड़ना ही था। ग्यारह शहजादे मुअज्जम और आजम दोनों के मन में दिल्ली के तख्त को हथियाने के सपने पल रहे थे। उन्हें विश्वास था कि आज नहीं कल उनका बूढ़ा हुआ बाप दिल्ली की सत्ता उनकी झोली में डाल देगा। इसलिए कोई बड़ा पराक्रम करके बादशाह को दिखाने की स्पर्धा दोनों के भीतर चल रही थी। कुछ वर्ष पूर्व बड़ा शहजादा मुअज्जम गोवा के पास सम्भाजी महाराज से पराजित होकर खाली हाथ लौट आया था। किन्तु यहाँ यदि अपराजित आदिलशाह को नेस्तनाबूद करके दिल्लीपति बनने की कामना से शहजादा आजम बीजापुर में घनघोर युद्ध कर रहा था। किन्तु शहजादे का भाग्य साथ नहीं दे रहा था। उसकी निरंतर असफलता और बिगड़ती हालत देखकर उसके पास बादशाह ने पत्र भेजा, "जितना नुकसान अब तक हो चुका उतना बहुत है। अब सब कुछ छोड़कर वापस आ जाओ।" बादशाह के इस फरमान को सुनकर शहजादा आजम फूट-फूटकर रोया था। कोई पराक्रम दिखाने का अवसर उसके हाथ से निकलता जा रहा था। शहजादा आजम ने अपने पिता को तुरन्त पत्र लिखा, "यदि आपकी बची हुई फौज मेरे साथ लड़ने को तैयार नहीं है तो मैं अपनी बेगम और अपने बच्चों के साथ अन्तिम साँस तक लड़ता रहूँगा। अन्तिम क्षण तक शत्रु का सामना करूँगा। शाहंशाह हमारी लाश को बीजापुर की सीमा में ही दफना दें।" इस पत्र को पढ़कर बादशाह आश्चर्यचकित रह गया। ऐसे दृढ़ उत्तर की उसे आशा न थी। उसे आशा नहीं थी कि उसका कोई शहजादा इतनी जिद दिखाएगा। वह अपने इस शहजादे को दाद देने का इच्छुक हो गया। उसने फिरोजजंग के नेतृत्व में पाँच हजार बैलों का दल तैयार किया। बैलों की पीठ पर पर्याप्त रसद लादी गयी। साथ में बादशाह ने गश्ती की सेना भी बीजापुर भेजी। नयी रसद को पाकर आजम की जान में जान आ गयी। उसने बीजापुर का घेरा और भी कसना शुरू सम्भाजी :: 543