छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंकिया। बादशाह को सारी पुरानी बातें याद आने लगीं। बादशाह बहुत उद्विग्न हो गया। उसकी आँख की आग वजीर को स्पष्ट दिखाई पड़ी। औरंगजेब ने क्रोध से कहा, "वजीरे आजम और कब तक चलेगा यह बीजापुर का घेरा? दक्खिन की इस कठोर और धोखेबाज मिट्टी के साथ कितने दिन बीत गये? इसका हिसाब कीजिए। छः सात साल। मेरी जगह कोई दूसरा बादशाह होता तो केवल युमना के पानी को याद करके पागल हो गया होता।" बादशाह की वह मनोदशा देखकर वजीर चुप हो गया। अन्य सरदार और सेवकों ने सिर नीचे झुका लिया। कुछ दिनों से बादशाह की गर्दन कुछ हिलने लगी थी। अपनी गर्दन को हिलने से रोकने की कोशिश की। वह यह दिखाने की कोशिश कर रहा था कि अभी बूढ़ा नहीं हुआ है या पका नहीं है। उसने कहा, "असदखान बीजापुर की इस जालिम जंग में बड़े शहजादे मुअज्जम को भी शामिल होने का फरमान मैंने भेजा है।" "बड़ा शहजादा वहाँ जाएगा तो छोटे शहजादे को यह बहुत अच्छा नहीं लगेगा। हुजूर इसीलिए कर रहा था" वजीर ने लड़खड़ाते हुए कहा। शहंशाह के चेहरे पर विषादपूर्ण हँसी आयी, फिर भी उसने अपने अन्दर की भड़ास निकालते हुए कहा, "अब किसी का क्या अच्छा लगता है, यह महत्त्वपूर्ण नहीं है, असदखान। इस समय सबसे महत्त्वपूर्ण दक्खिन की इस मिट्टी में फँसी हुई अपनी तकदीर को बाहर निकालना। नहीं तो मेरी कब्र के लिए आपको यहीं कहीं पर जगह ढूँढनी पड़ेगी।" 544 सम्भाजी