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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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कबड्डी-कबरी एक सैनिक कार्यवाही शीघ्रता से आरम्भ हो गयी। अलग अलग मोर्चों पर शम्भू महाराज के सरदार लड़ रहे थे। उन्हें पर्याप्त शस्त्रों, रसद और घोड़ों की पर्याप्त आपूर्ति हो रही है या नहीं, इसकी जाँच की जा रही थी। उसी समय बगल की तगाई कचहरी पर भी खूब भीड़ बढ़ रही थी। अलग अलग क्षेत्रों से माँगें आ रही थीं। जाँच पड़ताल के बाद किसानों को खेती के लिए कर्ज बाँटा जा रहा था। बीज आदि के लिए सरकार की ओर से धन दिया जा रहा था। दरबार में सैनिक और कृषिकार्य का काम साथ-साथ चल रहा था। शम्भू महाराज महारानी येसूबाई और कवि कलश कठिन परिश्रम कर रहे थे। प्रत्येक गाँव के मुखिया एवं सरदार को बुलाकर शम्भू महाराज ने सभी को समझाया, "स्वयं को जीवित रखते हुए अपने पशुओं को भी जीवित रखिये। अस्तबल और तबेले उजड़ जाएँगे तो भविष्य में बड़ी समस्या होगी। खेतों में अनाज पैदा नहीं होगा, तो हमारी सीमाओं की रक्षा कौन करेगा?" हमेशा की भाँति आज भी काम की भाग दौड़ जारी थी। उसी समय द्वारपाल दौड़ते हुए भीतर आया। उसने गणोजी शिर्के के आने की सूचना दी। द्वारपाल के पीछे पीछे महाराज की आज्ञा की बिना प्रतीक्षा किये गणोजी अन्दर आ गये। उनके आते ही दरबार की स्थिति बदल गयी। यह समझकर कि कोई गम्भीर समाचार लेकर गणोजी आये हैं, अन्य लोग बाहर चले गये। महारानी येसूबाई ने गणोजी की ओर देखा। गणोजी कल से ही आकर पाचाड़ के महल में रुके हैं। इसकी सूचना महारानी को मिल गयी थी। किन्तु उन्हें इस बात का अनुमान नहीं था कि वे इतने सवेरे गढ़ चढ़कर ऊपर आएँगे। गणोजी को देखकर महाराज और महारानी सावधान होकर बैठ गये। कवि कलश उठे और अपने हाथ के काग़ज पत्र पास की मेज पर रखकर बाहर जाने लगे। उनकी ओर 568 सम्भाजी