छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
पृष्ठ 572, कुल 793 में से
संदर्भ में पढ़ेंकिन्तु सन्ताप से उफनते गणोजी राव रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे। बीच में राजा के हित की चिन्ता प्रकट करते हुए गणोजी बोले, "शम्भू महाराज चाहे आप मुझे कुछ भी न दें, किन्तु कलश नाम के इस काल सर्प को पहले बाहर निकाल दें। हमारे ससुर के पुण्यप्रताप से प्राप्त इस राज्य को बचाइये।" "गणोजीराव आपकी बात ठीक है। किन्तु कवि कलश को निकालकर मैं अपने सिर को किसके कन्धे से विश्वासपूर्वक टिकाऊँ? आपके? कौन है कविराज की जगह लेने वाला? हमारा दुर्दिन देखकर अर्जुन भोसले जैसा चचेराभाई साथ छोड़कर चला गया। सगे बहनोई महादजी निंबालकर आज वहाँ खान की फौज में हैं। हरजीराजा बहादुर हैं किन्तु लोभी हैं। बचे गणोजीराव। आप केवल शरीर से यहाँ हैं, मन से बादशाह के तम्बू में। माँ भवानी! कैसा कठिन समय आया है? स्वराज्य की नौका डूबे नहीं, इसके लिए हम एक-एक व्यक्ति को जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। किन्तु वहाँ शिवाजी महाराज का सगा जामाता औरंगजेब की वन्दना कर रहा है।" शम्भू महाराज की स्पष्टोक्ति से गणोजीराव कुछ विचलित हुए। वे नितान्त अपमानित मुद्रा में लम्बी साँस लेते हुए बोले, "देखा येसू? तुम्हारे पतिदेव का मुझ पर कितना भरोसा है? और कोई बात नहीं है। उस कलश नाम के कालसर्प ने राजा के दिमाग में ऐसा जहर घोल दिया है कि उन्हें यह पता ही नहीं चल रहा है कि कौन अपना है और कौन पराया? मेरे जैसा पराक्रमी व्यक्ति भी उन्हें ठीक से दिखाई नहीं दे रहा है।" "छोड़िए भी अब गणोजी शिर्के! वह कलश तो जाति का ब्राह्मण है, फिर भी जिस समय शहाबुद्दीनखान ने रायगढ़ पर अचानक आक्रमण किया था, उस समय कवि कलश ने साहसपूर्वक अपनी शिखा में गाँठ बाँध ली थी। हाथ में तलवार लेकर साहसपूर्वक मुकाबला किया था। घोड़े को नचाते हुए रायगढ़ को बचाया था।" "मतलब! इसका मतलब हमने कुछ भी नहीं किया।" "यह बात आप अपनी आत्मा से पूछें। हमने इतनी लड़ाइयाँ लड़ीं। उनमें से क्या किसी भी युद्ध का नाम आप बता सकते हैं, जिसमें गणोजीराव शिर्के नाम के, शम्भू महाराज के सगे साले ने हाथ में तलवार लेकर पहली पंक्ति में लड़े हों? पीछे रहकर कपड़े सँभालने वाले बच्चों में भी आप कभी नहीं थे।" इस तीखे प्रश्न से गणोजी सकपका गये। वे छटपटाकर बोले, "इसका मतलब आप मुझे उस कलश की पंक्ति में बिठा रहे हैं?" "बिल्कुल नहीं। इस गलतफहमी में आप न रहें। उनकी पंक्ति में बैठने के लिए आप किसी तरह से योग्य नहीं हैं। शम्भुराजा की मित्रता के लिए वह जमीन 570 सम्भाजी