छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
पृष्ठ 577, कुल 793 में से
संदर्भ में पढ़ेंकी मृत्यु का संकट भी आपने सहन कर लिया। किन्तु महाराज आपके चेहरे पर निराशा की एक भी रेखा नहीं उभरी। शेर जैसी हिम्मत ही आपका असली सामर्थ्य है। तुलजा भवानी से एक ही प्रार्थना है कि आपके इस दुर्दम साहस और आपकी वीरवृत्ति को किसी की नजर न लगे।'' येसूबाई के धैर्यपूर्ण उद्गार से सम्भाजी महाराज का मन भर आया। उन्होंने कातर स्वर में पूछा, "येसू, क्या आपको लगता है कि इस भयपर्वत को यह शम्भुराजा पार कर सकेगा?" "बेशक! इतने संकट आये फिर भी आपने सह्याद्रि के मजबूत किलों में से एक भी शत्रु के हाथ नहीं लगने दिया। आपके डरने या पीछे हटने का कोई कारण ही नहीं है। जब भी बड़े महाराज स्वर्ग से अपने स्वराज्य की ओर देखते होंगे, वे सन्तोषपूर्वक यही कहते होंगे कि 'मेरे शम्भुराजा, मेरा हिन्दवी स्वराज्य तुम्हारे फौलादी हाथों में सुरक्षित है'।" तीन खंडो बल्लाल की ओर देखते हुए शम्भू महाराज ने कहा, "खंडोजी, गोवा के वाइसराय को सन्देशा भेजिए। उनसे कहिये, कि हम आपसे गोला बारूद नहीं माँग रहे हैं किन्तु चावल का उत्तम किस्म का बीज हमें आपसे चाहिए।" खंडो बल्लाल और येसूबाई महाराज की ओर देखते रह गये। महाराज ने बड़े उत्साह से कहा, "महारानी इस बार तो हमारे राज्य में अच्छी फसल होनी चाहिए। पिछले सात-आठ वर्षों में कितनी लड़ाइयाँ हुईं फौजों की खेतों में भाग दौड़, फसलों की बर्बादी। कितना बुरा हाल हुआ हमारा और हमारी फौज का।" "सच है महाराज।" "शीघ्र ही इस युद्ध पर्व का अन्त होने वाला है। औरंगजेब अपनी फौज के साथ डूबने वाला है। उसके बाद दूसरा काम ही क्या है? किसान अपनी फसलें बोयें, सोने मोती-सी फसल पैदा करें। उत्तम फसल हम उत्तम बीज की आपूर्ति करेंगे। उस रात महाराज ने जगदीश्वर के मन्दिर में वहाँ की ठंडी हवा का आनन्द लेने का मन बनाया था। जीवन में पहली बार महाराज पालकी में मन्दिर गये। दर्शन सम्भाजी :. 575