छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंबुरा नहीं है। गणोजी आज नीचता की हद पर पहुँच गया है। उसका मुँह तोड़ने के अतिरिक्त हमारे पास कोई विकल्प ही नहीं है। किन्तु यदि आप वहाँ जाएँगी तो रायगढ़ का राजकीय कार्यभार कौन सँभालेगा?'' ''क्या मतलब महाराज?'' ''आज मराठा राज्य की महारानी की अपेक्षा मुख्य दीवान का दायित्व आप पर अधिक है। इसके अतिरिक्त राजकीय कार्यभार सँभालने वाला कोई समर्थ और भरोसेमन्द व्यक्ति बचा भी तो नहीं है।'' येसूबाई कुछ बोली नहीं। तब सम्भाजी महाराज ने आशाभरी दृष्टि से कविराज की ओर देखा। कविराज के चेहरे का रंग बदल गया। महाराज ने दुख से कहा, ''क्षमा करें कविराज, सभी अप्रिय कार्य करने की जिम्मेदारी दुर्दैव से आपके ही ऊपर आती है। इससे पहले हंबीरराव जैसे आत्मीय व्यक्ति पहाड़ की तरह हमारे पीछे खड़े होते थे। किन्तु दुष्ट काल ने उन्हें हमसे छीन लिया। कोंडाजी बाबा जैसे रत्न को हमने जंजीरे के लिए खो दिया। धनाजी, सन्ताजी और खंडो बल्लाल जैसे तरुण योद्धा किसी न किसी मोर्चे पर स्वराज्य के लिए लड़ रहे हैं। इसलिए आपके अतिरिक्त और कोई भरोसे का आदमी बचा ही नहीं है।'' महाराज के विषण्ण सुर से कविराज उत्साहित हो गये। वे शम्भू महाराज के सामने झुककर, उनका वन्दन करते हुए बोले, ''आज्ञा करें, राजन, केवल आज्ञा करें।'' ''कल सवेरे पाचाड़ से निकालिए। पन्द्रह हजार की सेना लेकर औरंगजेब और गणोजी के फौजी समझौते होने से पहले ही प्रभावली पहुँच जाइये। शिर्के के बचे खुचे तबेले और महल बेचिराग कर दीजिए। हिन्दवी स्वराज्य का गला घोंटने से पहले ही, शिर्के के सारे षड्यन्त्र को ध्वस्त कर दीजिए। शिर्के का सारा इलाका आग के हवाले कर दीजिए।'' पाँच लालबारी की दशा अत्यन्त शोचनीय हो गयी थी। बहुत से शाही हकीम और हिन्दू वैद्य वहाँ से दबे पाँव लौट रहे थे। बादशाह का दल ही नहीं पूरी लालबारी कराहती-सी प्रतीत हो रही थी। बुखार के ऐसे रूप का मुगल सेना ने कभी अनुभव 584 :: सम्भाजी