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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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"आज सवेरे अपनी मेवाती और मुल्तानी फौज के मुखिया मुझसे मिलने आये थे। उन्हें दो महीने से तनख्वाह क्यों नहीं दी गयी? तनख्वाह के लिए फौजियों को कितने दिन इन्तजार करना चाहिए?" "हुजूर अब तक आधा खजाना खाली हो चुका है-अभी आगे-?" "क्या बकते हो? जुल्फिकार, अरे दक्षिण के दो विख्यात राज्यों को हमने जीता। उनका खजाना लूटकर ले आये। फिर भी खजाना खाली ?" "जहाँपनाह, पिछले दो महीने से बंगाल से आने वाली वसूली आयी ही नहीं। अपना सूबेदार खुर्शीद कुलीखान वहाँ टालमटोल कर रहा है। बाकी के हमारे सारे हिन्दुस्तानी सूबेदार भी नियमित रूप से गशि भेज नहीं रहे हैं। उन्हें लगता है-उन्हें" "हाँ, बोलो, बोलो। अपने मन की बात साफ-साफ कहो।" "हुजूर उन्हें लगता है कि बीजापुर, गोलकुंडा जीत लिया तो भी बीच में अभी मराठे हैं। उस जहन्नमी सम्भा की फौज को पार करके अपनी शाही फौज का दिल्ली पहुँचना इतना सरल नहीं है।" यह कहते हुए जुल्फिकार का चेहरा भय के कारण पसीने से भीग गया। बादशाह ने क्रोध से अपनी आँखें घुमाईं। अपने क्रोध को उसी तरह दबा लिया जैसे विष का प्याला सहज रूप से पी लिया हो। उसने जुल्फिकार की सहायता से एक बड़ा षड्यन्त्र रचा था। यह षड्यन्त्र था रायगढ़ से राजाराम को उठाकर ले आने का। उनका नाम सामने रखकर मराठा राज्य की दूसरी गद्दी स्थापित करने की योजना थी। बादशाही का संरक्षण देकर पूना के आसपास दूसरी राजगद्दी बनानी थी। अनुमान था कि इससे औरंगजेब की शरण में पहले ही आ चुके गद्दार और सम्भाजी से असन्तुष्ट मराठे और ब्राह्मण एकत्र हो आएँगे। वे भी प्रसन्न होंगे। सम्भाजी की शक्ति कम हो जाएगी। हिन्दवी स्वराज्य अपने आप ध्वस्त होने लगेगा। किन्तु फौलादी सुरक्षा वाले रायगढ़ से राजाराम को उठा ले आना, गुलबकावली के फूल प्राप्त करने जितना ही कठिन था। फिर भी निर्भीक सीने वाले बीस पठान और तुर्की फौजी रायगढ़ की ओर चले गये थे। उनका स्मरण करते हुए औरंगजेब ने पूछा, "वहाँ की कुछ खबर ?" "जहाँपनाह, योजना आपके दिमाग की उपज है। उसकी तामील हम बड़ी सावधानी और होशियारी से कर रहे हैं। हमारा जैनुद्दीन गोलकुंडा का सरदार खवासखान के रूप में कभी का चला गया है। उसके साथ उन्नीस बहादुर सिपाही हैं।" "उस सम्भा को सन्देह हो गया तो-?" सम्भाजी ·· 587