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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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पत्र पढ़ लिया गया। औरंगजेब ने आँखें ऊपर उठाकर जुल्फिकार से पूछा, “जुल्फिकार, इस गणोजी की सेना कितनी बड़ी है?'' “गणोजी की फौज—फौज” जुल्फिकारखान रुकते हुए बोला, “होगी हजार-बारह सौ की लाठी-लकड़ियों वाली भीड़। फौज कहने लायक कोई भी चीज उनके पास नहीं है।'' “हूँ, जुल्फिकार इस प्लेग की चपेट से मुक्त होते ही हमें सम्भा की ओर कूच करना है।'' “जी, हुजूर।” बादशाह बैठक में ही था कि भीतर बदहवास नौकर दौड़ते हुए आये। नौकरों के भयभीत चेहरे को देखकर बादशाह घबरा गया। तुरन्त उठकर भीतर की ओर चलता बना। उसे जानना था कि गाँठ का ज्वर उदयपुरी को आया है या औरंगाबादी महल को। बादशाह ने भीतर जाकर देखा। औरंगाबादी बेगम को भयंकर ज्वर चढ़ा था। उसकी काँख के नीचे सुर्ख गाँठ फूल आयी थी। औरंगाबादी बेगम असह्य पीड़ा से बिस्तर में छटपटा रही थीं। जुल्फिकार ने शाही हकीम के पास सन्देश भेजा। किन्तु बहुत समय बीत जाने पर भी हकीम नहीं आया। तब फौलादखान ने सिर नीचा करके कहा, “हुजूर कल रात को शाही हकीम इस जालिम रोग से अल्लाह को प्यारे हो गये।'' “उसके बेटे को बुलाइये।” “हुजूर वह सवेरे ही अपने बाप को दफनाकर वापस आया। अब उसकी भी जाँघ में गाँठ उठ गयी है। बेचारा अपने डेरे में मुर्गी की तरह छटपटा रहा है।” अन्त में जो होना था हो गया। गाँठ के इस दानवी रोग ने काला-गोरा, हिन्दू-मुसलमान, राजा-रंक जैसा कोई भेद किया ही नहीं था। उसने अपने जबड़े में बादशाह की लगभग पचहत्तर हजार सेना निगल ली थी। उसी में औरंगाबादी बेगम के रूप में एक और का इजाफा हुआ। दूर देश की ऊबड़-खाबड़ जमीन पर औरंगाबादी बेगम को दफन किया गया। कब्र की एक मुट्ठी गीली मिट्टी लेकर औरंगजेब खूब रोया। सभी को लगा कि बेगम के वियोग ने उसे विकल कर दिया है। किन्तु बादशाह अपने भीतर की घोर वेदना को बाहर निकाल रहा था। पिछले छह-सात वर्षों में की गयी बादशाह की सारी कोशिश, उसकी प्रचंड महत्त्वाकांक्षा और झोली में आयी नगण्य सफलता। दैवी शक्ति के सामने मनुष्य की विवशता, दुःख, विफलता, निराशा आदि का वह सारतत्त्व था। दस-पन्द्रह दिन और बीते। महामारी धीरे-धीरे समाप्ति पर आयी। सौभाग्य सम्भाजी : 589