भारतकोश
छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

पृष्ठ 61, कुल 793 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 61

की युवराज रायगढ़ पर रह गये तो काल की तरह भयानक बन जाएँगे। सिंहासन की बात तो छोड़ो कल को संभाजी के लिए सिर टिकाने के लिए एक आसन भी न बच पाये, इसके लिए सभी राहु केतु एकजुट होकर कार्य कर रहे हैं।" शम्भुराजा की बातों से उनके इष्टमित्र अत्यन्त दुखी हो गये। कवि कलश के चेहरे का लाल रंग तो कब का गायब हो चुका था। शम्भुराजा ने बड़े दुख के साथ कहा, "कर्नाटक की लड़ाई भले ही मेरे भाग्य में न हो, परन्तु मुझे इस बात का दुख है कि आज रायगढ़ के दरवाजे पर पहरा देने वाले दरबान पर पिताजी का जितना भरोसा है उतना उनके अपने बेटे पर नहीं रहा। इसी बात से मेरा कलेजा सागौन के सूखे पत्ते की तरह चूर-चूर हो रहा है।" छह संभाजी राजा महाराज के महल में आए। महाराज को प्रणाम करते हुए उन्होंने कहा, "पिताजी! आशीर्वाद दीजिए, आज दोपहर में हम निकल रहे हैं।" "कहाँ?" "और कहाँ जाएँगे? शृंगारपुर के लिए आपकी आज्ञा सिर आँखों पर।" शिवाजी महाराज क्षणभर चुप रहे, फिर ममतापूर्वक पुत्र के कन्धे पर हाथ रखकर बोले, "ऐसे कैसे? कल तक रुकिए, उसी रास्ते से तो हमें भी कर्नाटक की ओर जाना है, बात करते-करते संगमेश्वर तक चलेंगे।" दूसरे दिन दोपहर को दस बारह शाही पालकियाँ बाहर निकलीं, नाणे दरवाजे से नीचे की ओर उतरने लगीं। उसी समय तुरुही और तासे की आवाज से सारा परिसर प्रतिध्वनित हो उठा। कहार पालकी लेकर चितदरवाजे के पास पहुँच गये। शिवाजी महाराज और संभाजी राजा ने पाचाड़ के मैदान पर दृष्टि डाली। वहाँ पर बीस हजार घुड़सवार और चालीस हजार पैदल सैनिक खड़े थे। बहुत समय के विश्राम के बाद शिवाजी महाराज लड़ाई पर जा रहे थे। इस समाचार से ही जानवर और आदमी रोमांचित हो रहे थे। आज महाराज को प्रभावशाली आशीर्वाद देने के लिए जीजा माता जिन्दा नहीं थीं। इसलिए लड़ाई के लिए प्रस्थान करने के पूर्व राजाओं की पालकियाँ जीजा माता की समाधि की ओर अपने आप मुड़ गयीं। काले पत्थरों से बनी छोटी सी समाधि पर महाराज ने जवाकुसुम और स्वर्णचम्पा के पुष्प अर्पित किये। उस पवित्र समाधि सम्भाजी :: 59

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास) · पृष्ठ 61, कुल 793 में से · BharatKosha