भारतकोश
छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

पृष्ठ 615, कुल 793 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 615

हुए सम्भा को गिरफ्तार कर लें तो?'' ''यह कैसे सम्भव है, सरकार?'' गणोजी ने हँसते हुए कहा, ''अजी वह सम्भा हवा का एक तेज झोंका ही है।'' ''लेकिन सुना है कि पिछले साल उसका पड़ाव एक महीने तक संगमेश्वर में ही था।'' ''इस वर्ष सम्भव नहीं लगता। सम्भाजी एक चक्कर खाता हुआ पखेरू है जिसकी चोंच तेज आरी की तरह धारदार है।'' गणोजी द्वारा अनजाने में शम्भुराजा की प्रशंसा की उपेक्षा करते हुए मुकर्रबखान ने पूछा, ''जब कभी वह सम्भा कोंकण मे विशालगढ़ की ओर जाता है तो उस ओर जाने वाला रास्ता किस गाँव से होकर जाता है?'' ''जाहिर है, संगमेश्वर से होकर ही।'' मुकर्रबखान मन ही मन हँसा, बोला, ''गणोजी, तुम पहाड़ी लोगों को सीधा सा व्यवहार भी नहीं आता? कोई राहगीर जब एक स्थान से दूसरे स्थान को जाता है तो मार्ग में किसी गाँव की सराय में लोटाभर पानी पीने के लिए तो रुकता ही होगा? दोपहरी में किसी पेड़ के नीचे घड़ी भर के लिए आराम तो करता ही होगा?'' ''क्या मतलब?'' ''तुमने ही तो बताया कि सगमेश्वर में सम्भा और कलश के बड़े बड़े महल हैं।'' गणोजी धीमे और शान्त स्वर में बोला, ''मुकर्रब मियाँ हाथ में मुझे तलवार पकड़ने का भले ही अच्छा अभ्यास न हो किन्तु हमारी खोपड़ी कमजोर नहीं है। जानते हैं? आपकी खुफिया खबरों की जानकारी हमें भी रहती है। यह सम्भा आपके बादशाह की लाख कोशिश के बावजूद मिल नहीं रहा है। इसी दुख से बादशाह अपने सिर पर मुकुट नहीं पहनता। अब तो सम्भा के न मिलने के अपयश से उसकी हिम्मत भी पस्त हो चुकी है। ये सारी बातें हम अच्छी तरह जानते हैं। माता शिरकाई एक बुरी घटना से बचा ले तो बेहतर है।'' ''कौन-सी घटना?'' ''तुम्हारा खीझा हुआ, हिम्मतपस्त नाकाम बादशाह किसी दिन अचानक दिल्ली की ओर कूच न कर जाय, बस।'' मुकर्रबखान की स्थिति ऐसी हो गयी मानो सावन की कोमल धूप को पराजित करके उसके ऊपर काले बादल उमड़ आये हों। गणोजी को पास खींचकर उसकी पीठ पर प्यार से हाथ फेरते हुए वह उसके कान में कुछ बुदबुदाया। ''यह तो अच्छा हुआ जो बात तुमने छेड़ी। सच कहता हूँ। बादशाह मुझ पर सम्भाजी · 613