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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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भी सिर्फ कुछ ही दिन विश्वास रखेगा। उसके बाद—उसके बाद दिल्ली की ओर निकल जाएगा।'' मुकर्रबखान की बातें सुनकर गणोजी एकदम रुआँसा हो गया। वह खान के पैर पर गिरते हुए बोला, "आप लोगों के दिल्ली की ओर रुख करते ही हमारी तो मौत ही हो जाएगी। उधर वारणें के दर्रे में बच्चे मकाई के भुट्टे कैसे खाते हैं? उसे तो आप जानते ही हैं। हरे भरे पत्तों के साथ भुट्टों को तोड़ते हैं फिर साफ करके उसे दहकते अंगारों में भूजते हैं, उस पर नमक लगाते हैं, फिर मजे से खाते हैं। उसी तरह सम्भा हम खानदानी जागीरदारों को बड़े मजे से निगल जाएगा। हमने उसे बहुत सताया है।'' "फिर करना क्या होगा?" "उसे लगे हाथों किसी भी तरह से ले जाइये, जिन्दा या मुर्दा। यदि आपने ऐसा नहीं किया तो हमें मरना होगा।'' मुकर्रबखान किसी प्रकार हँसकर बोला, "गणोजी, तुम हमारी कितनी मदद करते हो? उसी पर हमारी सफलता निर्भर करेगी।'' आसपास की पहाड़ियों पर आक्रमण करने अथवा शिकार के लिए बाहर निकलना पड़ सकता है। इसलिए मुकर्रबखान ने गणोजी और नागोजी को आदेश दे रखा था कि हर जगह पर उनके विश्वसनीय लोगों और सम्बन्धियों तथा उनके जानवरों को तैयार रखा जाय। यह अफवाह भी चारों ओर फैली हुई थी कि दक्षिण के दीर्घ प्रवास में निरन्तर असफलताओं के कारण औरंगजेब तंग आ गया है। निकट भविष्य में किसी भी समय दिल्ली की ओर कूच कर जाएगा। इस खबर से गणोजी और नागोजी जैसे जागीरदारों की धोती गीली होने को आ गयी थी। सभी बेचैन हो गये थे। गणोजी और नागोजी ने आसपास गाँवों के जमींदारों को गुप्त पत्र भेजे थे। ये पत्र सीधे देशमुख और देशपांडे लोगों के हाथ लग गये थे। "तुम लोग मराठे हों या ब्राह्मण। भगवान ने सभी को पेट दिया है। पेट के साथ साथ अपने पेट से उत्पन्न सन्तान की भी चिन्ता करनी होती है। आगामी पीढ़ी के हित के लिए जमींदारी जरूरी है। हम सभी परम्परा से सम्मानित जागीरदार हैं। जागीरदार का कोई राजा नहीं होता। हम स्वयं अपनी जागीर के राजा होते हैं। पिछली बारह पीढ़ियों से बारह प्रदेशों के बादशाहों ने हमें 'जागीरें' प्रदान की थीं। शिवाजी, सम्भाजी और उनका स्वराज्य तो अभी कल की चीजें हैं। इसके पहले तो सारा देश हमारे ही बाप दादों का था। इतना ही क्यों? आज के रायगढ़ पर ही नहीं कल की रायरी पर भी हमारा ही अधिकार था। हमारा ही स्वामित्व था। इसलिए सभी जागीरदारो एक हो जाओ, नेक हो जाओ। खान की मदद करके अपनी 614 : सम्भाजी