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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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खानदानी शान को बचा लो।'' मुकर्रबखान का तकाजा लगातार जारी था। अभियान की निश्चित दिशा का पता नहीं लग रहा था, किन्तु उसका उद्देश्य समझ में आ रहा था। खान के आदेशानुसार, पन्हालगढ़ के उस पार योगावती की घाटी, विशालगढ़ के पार अणुस्कुरा घाट, वारणा की बस्ती में पेटलोड ही नहीं श्रृंगारपुर के पास शिर्कों के जले हुए प्रदेश में भी गुप्त सन्देश पहुँचा दिए गये थे। ऊपर से शिवाजी और सम्भाजी की जयकार करने वाले पुराने जागीरदार भीतर से जमीन के टुकड़ों के लिए छटपटा रहे थे। उन्हें गुप्त रूप से सन्देश भेजा गया था, "अपने घोड़ों को तैयार रखें। शायद सागर की ओर किसी सौदागर की तलाश में निकलना पड़े। हट्टे कट्टे मजबूत घोड़े और रसद तैयार रखें।'' कोल्हापुर से कराड़ तक मुग़ल सेना के रास्ते से नागोजी माने का दस्ता लगातार भाग दौड़ कर रहा था। नागोजी जैसा अनुभवी और मँजा हुआ जागीरदार समझ चुका था कि बादशाह की सेवा का यह सुअवसर स्वयं चलकर आया है। इसलिए वह मुकर्रबखान की चाटुकारिता में खूब भाग दौड़ कर रहा था। अपने मित्रों और निकट सम्बन्धियों को भी सावधान कर रहा था। चार "मल्हारराव कृष्णाजी इस बुर्ज की जोड़ाई का काम हमारी आँखों के सामने दो दिन के भीतर पूरा होना चाहिए। इसके पूरा होने के पहले मैं विशालगढ़ नहीं छोड़ सकता।" सम्भाजी ने कहा। "सरकार, हम पर भी थोड़ा भरोसा कीजिए।" "मेरा भरोसा तुम पर तो है किन्तु उस औरंगजेब पर नहीं है।" सम्भाजी राजा बोल पड़े, "अपने सभी किले, परकोटे इतने मजबूत बनाएँगे कि एक एक किले की ओर देखते देखते औरंगजेब की जिन्दगी समाप्त हो जाय।" जैसे कि ऊँची, हट्टी कट्टी घोड़ी के पास खड़ा बछेड़ा शोभित होता है उसी तरह सह्याद्रि की एक प्रचंड चोटी की उँगली पकड़कर विशालगढ़ सुशोभित हो रहा था। सह्याद्रि की पहाड़ी के पास टूटे हुए किले की सँकरी लम्बोतरी खाई ने एक छोटी सी पगडंडी बना दी थी। ग्यारहवीं शताब्दी में भोजराज ने प्रथमतः इस सम्भाजी :: 615