छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंकवि कलश का ध्यान आकर्षित किया। वहाँ के बड़े पत्थरों और वहाँ ढलानदार चट्टानों ने भिन्न-भिन्न रूप धारण किये थे। एकदम सामने का कुछ हिस्सा घोड़ों के आकार का था। उसके पीछे की ढलान ने हाथी का आकार ले लिया था। पीछे की टूटी चट्टान ने कुछ मनुष्यों के आकार ले लिए थे। कहा जाता है कि बहुत पहले कभी किसी अज्ञात शक्ति ने वहाँ से एक पूरी बारात गायब कर दी थी। इसीलिए उस पर्वतीय जंगल की चट्टानों को हाथी, घोड़ों और ऊँटों का आकार प्राप्त हो गया था। लोगों ने उस टीले का नाम बारात टीला रख दिया था। अस्ताचलगामी सूर्य की कुछ किरणें बारात टीले के शरीर पर बकरी के छागलों के समान खेल-कूदकर लुप्त हो गयीं। आसपास के जंगल में घना अँधेरा छा गया था। शम्भुराजा की दृष्टि मुंढा दरवाजे की ओर गयी। वहाँ सैकड़ों मशालें और पलीते जल रहे थे। रात के अँधेरे में भी बुर्ज को जोड़ने का कार्य चल रहा था। शम्भुराजा के सधे कदम किले की ढाल पर चढ़ने लगे। उन्हें दूसरे दिन प्रातःकाल ही संगमेश्वर के लिए निकलना था। वहाँ आगे की राजनीति और नियोजन उनकी प्रतीक्षा में थे। पाँच भोजन का समय बहुत पहले बीत चुका था। सिपहसालार सो चुके थे। जानवर खूँटे से गर्दन खुजलाते या जुगाली करते निश्चिन्त पड़े थे। रात की हवा में विलक्षण गति थी। तम्बू-डेरों की रस्सियों में बहुत खिंचाव था। मुकर्रबखान को किसी भी करवट नींद नहीं आ रही थी। पिछले दो-तीन दिनों से गणोजी लगातार उसके पास चक्कर लगा रहा था। दोनों एक दूसरे के निकट घंटों बैठे रहते थे। खान अनेक प्रकार की शंकाओं-कुशंकाओं के सम्बन्ध में पूछता रहता था। गणोजी शिर्के शर्त लगाकर कहता था, "सियार मलकापुर से विशालगढ़ के बीच निश्चित रूप से कहीं है। वहाँ के किले का काम समाप्त करके वह जहाँ भी जाना चाहे, संगमेश्वर होकर ही जाएगा।" मुकर्रबखान ने गर्म उसाँसें भरते हुए पूछा, "रसद-पानी का क्या प्रबन्ध है?" "यह तो पहले से ही हमारा ही प्रदेश है। मैंने अपने सम्बन्धियों से पहले ही सन्देश भेजकर कह दिया है कि महत्त्वपूर्ण कार्य के लिए तैयार रहो।" गणोजी खान को खबरें देता और बदले में खान से द्रव्यों की थैलियाँ लेकर सम्भाजी :: 621