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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

पृष्ठ 624, कुल 793 में से

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पृष्ठ 624

जाता। गणोजी धीरे-धीरे बता रहा था, "आज या कल, शाम में या दिन में किसी भी समय निकलना होगा।" सारी बातों को याद करके खान ने बेचैनी से करवट ली। उसने कनात की खिड़की से बाहर देखा। बाहर की खिड़की से चाँदनी में पन्हालगढ़ की पहाड़ी दिख रही थी। वह आँखों में सालने लगी, इसलिए उसने अपनी आँखें बन्द कर लीं। आँखें बन्द हुईं तो उसे पहले कभी भी न देखी हुई सम्भाजी राजा की निर्भीक और निर्द्वन्द्व दिनचर्या आँखों में नाचने लगी। उसके मन को न शान्ति थी और न ही शरीर को विश्राम। इसी समय खान की छावनी के बाहर घोड़ों की टापें सुनाई पड़ने लगीं। मुकर्रबखान तुरन्त उठकर अपने डेरे के दरवाजे के बाहर देखने लगा। सामने से दो हरकारे दौड़ते हुए उसके पास पहुँचे। बोलने में जरा भी समय नष्ट न करके हरकारों ने एक लिफाफा खान के सुपुर्द किया। मशाल के प्रकाश में खड़े-खड़े ही पत्र का वाचन किया गया। पत्र का आशय समझते ही खान के सिर के बाल खड़े हो गये। वजीरे आजम असदखान के पत्र को खान ने एक बार पुनः पढ़ा- "प्यारे शेख निजाम मुकर्रबखान। बादशाह सलामत का आपके लिए अतिआवश्यक सन्देश है। इसे शीघ्रता से भेजा जा रहा है। आपकी आँखों में हमेशा धूल झोंकने वाला वह जागीरदार रायगढ़ छोड़कर विशालगढ़ में घूम रहा है। यह पक्की खबर बादशाह को मिल चुकी है। वह बहुत लापरवाह है। भविष्य के हमलों के लिए अपने किले की बुर्जों की मरम्मत कराने में व्यस्त है। उसके साथ फौज भी बहुत कम है। अतः यह पैगाम मिलते ही शीघ्रता से निकल पड़ो। आपके हाथों अल्लाहताला की खिदमत होना निश्चित है। इसलिए अपनी जान की परवाह न करके थोड़ा साहस दिखाएँ। उस दुष्ट जमींदार को तत्काल गिरफ्तार कर लें। उस काफिर से किसी भी तरह प्रतिशोध लेना है। मुकर्रबखान आपकी बहादुरी और अल्लाहताला की मेहरबानी की ओर बादशाह की रात-दिन उम्मीद बँधी है। इस बात को आप एक क्षण के लिए भी न भूलें।" इस साहसी अभियान की कल्पना मात्र से ही मुकर्रबखान की मुद्रा मशाल की तरह चमक उठी। आवेश में आकर वह पागल की तरह अपनी छावनी की भेड़- बकरियों से लिपटने लगा। बेचैन होकर वहीं पर चहलकदमी करने लगा। उसने अपने सभी बहादुर सिपहसालारों को एकत्र होने का हुक्म दिया। खान की उम्र पचपन वर्ष की थी, किन्तु उसका शरीर चुस्त, मजबूत और छरहरा था। अपने पेट और पार्श्वभाग पर उसने चर्बी नहीं चढ़ने दी थी। उसने अपने को सबल और फुर्तीला बनाये रखा था। वह तत्काल डेरे से बाहर निकल पड़ा। दबी हुई किन्तु 622 :: सम्भाजी

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